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कालिदास के ग्रन्थ।

भूगोल-ज्ञान।

मेघदूत में कालिदास ने जो अनेक देशों, नगरों, पर्वतों और नदियों आदि का वर्णन किया है उससे जान पड़ता है कि उन्हें भारत का भौगोलिक ज्ञान भी बहुत अच्छा था। चोल, केरल और पाण्ड्य देश का उन्होंने जैसा वर्णन किया है। विन्ध्यगिरि, हिमालय और काश्मीर के विषय में उन्होंने जो कुछ लिखा है, रघुवंश के तेरहवें सर्ग में भारतीय समुद्र के सम्बन्ध में जो उक्तियाँ उन्होंने कहीं हैं—वे सब प्रायः ठीक हैं।

कालिदास के ग्रन्थ।

रघुवंश, कुमारसम्भव और मेघदूत, ये तीन काव्य और शकुन्तला, विक्रमोर्वशीय और मालविकाग्निमित्र, ये तीन नाटक कालिदास के प्रधान ग्रन्थ हैं। इनके सिवा ऋतुसंहार, शृङ्गारतिलक, श्यामलादण्डक आदि और भी कई छोटी छोटी पुस्तकें उनके नाम से प्रसिद्ध हैं।

कुमारसम्भव।

कुमारसम्भव में शिव-पार्व्वती के विवाह की कथा है। श्रीयुत बाबू अरविन्द घोष की राय है कि कवि ने उसमें पुरुष और प्रकृति के संयोग का चित्र दिखाया है। इसी संयोग से इस संसार की सृष्टि हुई है। इस काव्य में कवि ने यह भी स्पष्टतापूर्वक दिखाया है कि जीवात्मा किस तरह ईश्वर की खोज करता है और कैसे उसे प्राप्त करता है। इस तरह कवि ने धर्म-सम्बन्धी दो बड़े भारी आध्यात्मिक और दार्शनिक तत्त्वों को स्त्री-पुरुष के चरित्र के व्याज से प्रकट कर दिखाया है। सांसारिक विषयों के वर्णन का यह बहुत ही अच्छा ढंग है।

मेघदूत।

मेघदूत में कालिदास ने आदर्श प्रेम का चित्र खींचा है। उसको सविशेष हृदयहारी और यथार्थता-व्यञ्जक बनाने के लिए यक्ष को नायक कल्पना करके कालिदास ने अपने कवित्व-कौशल की पराकाष्ठा करदी है। निःस्वार्थ और निर्व्याज प्रेम का जैसा चित्र मेघदूत में देखने को मिलता है वैसा और किसी काव्य में नहीं। मेघदूत के यक्ष का प्रेम निर्दोष है। और, ऐसे प्रेम से क्या नहीं हो सकता? प्रेम से जीवन पवित्र हो सकता है, प्रेम से जीवन को अलौकिक सौन्दर्य प्राप्त हो सकता