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रंगभूमि

सोफिया—"मुझे तो विश्वास है कि वह चुप होकर कभी न बैठेगा, चाहे इस जमीन के पीछे उसकी जान ही क्यों न चली जाय।"

क्लार्क—"नहीं प्रिये, ऐसा कदापि न होने पायेगा। जिस दिन यह नौबत आयेगी, सबसे पहले सूरदास के लिए मेरे कंठ से जय-ध्वनि निकलेगी, सबसे पहले मेरे हाथ उस पर फूलों की वर्षा करेंगे।"

सोफिया ने क्लार्क को आज पहिली ही बार सम्मान-पूर्ण प्रेम की दृष्टि से देखा।