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रंगभूमि


में हथकड़ियाँ और पैरों में बेड़ियाँ डाल दी गई। निश्चय हो गया कि इन पर आज ही अभियोग चलाया जाय। सशस्त्र पुलिस उन्हें अदालत की ओर ले चली। हजारों आदमियों की भीड़ साथ हो गई। सब लोग यही कह रहे थे-"हुक्काम ऐसे सज्जन, सहृदय और परोपकारी पुरुष पर अभियोग चलाते हैं, बुरा करते हैं। बेचारे ने न जाने किस बुरी साइत में यहाँ कदम रखे थे। हम तो अभागे हैं ही, अपने पिछले कर्मों का फल भोग रहे हैं; हमें अपने हाल पर छोड़ देते, व्यर्थ इस आग में कूदे।” कितने ही लोग रो रहे थे। सबको निश्चय था कि न्यायाधीश इन्हें कड़ी सजा देगा। प्रतिक्षण दर्शकों की संख्या बढ़ती जाती थी और पुलिस को भय हो रहा था कि कहीं ये लोग बिगड़ न जायँ। सहसा एक मोटर आई और शोफर ने उतरकर पुलिस अफसर को एक पत्र दिया। सब लोग ध्यान से देख रहे थे कि देखें, अब क्या होता है। इतने में विनयसिंह मोटर पर सवार कराये गये और मोटर हवा हो गई। सब लोग ताकते रह गये।

जब मोटर कुछ दूर चली गई, तो विनय ने शोफर से पूछा- "मुझे कहाँ लिये जाते हो?"

शोफर ने कहा—"आपको दीवान साहब ने बुलाया है।"

विनय ने और कुछ न पूछा। उन्हें इस समय भय के बदले हर्ष हुआ कि दीवान से मिलने का यह अच्छा अवसर मिला। अब उनसे यहाँ की स्थिति पर बातें होंगी। सुना है, विद्वान् आदमी हैं। देखूँ, इम नीति का क्योंकर समर्थन करते हैं।

एकाएक सोफर बोला—“यह दीवान एक ही पाजी है। दया करना तो जानता ही नहीं। एक दिन बचा को इसी मोटर से ऐसा गिराऊँगा कि हड्डी-पसली का पता न लगेगा।"

विनय—"जरूर गिराओ, ऐसे अत्याचारियों की यही सजा है।"

शोफर ने कुतूहल-पूर्ण नेत्रों से विनय को देखा। उसे अपने कानों पर विश्वास न हुआ। विनय के मुँह से ऐसी बात सुनने की उसे आशा न थी। उसने सुना था कि वह देवोपम गुणों के आगार हैं, उनका हृदय पवित्र है। बोला-"आपकी भी यही इच्छा है?"

विनय—"क्या किया जाय, ऐसे आदमियों पर और किसी बात का तो असर ही नहीं होता।"

शोफर—"अब तक मुझे यही शंका होती थी कि लोग मुझे हत्यारा कहेंगे, लेकिन जब आप-जैसे देव-पुरुष की यह इच्छा है, तो मुझे क्या डर? बचा बहुत रात को घूमने निकला करते हैं। एक ठोकर में तो काम तमाम हो जायगा।"

विनय यह सुनकर ऐसा चौंके, मानों कोई भयंकर स्वप्न देखा हो। उन्हें ज्ञात हुआ कि मैंने एक द्वेषात्मक भाव का समर्थन करके कितना बड़ा अनर्थ किया। अब उनकी समझ में आया कि विशिष्ट पुरुषों को कितनी सावधानी से मुँह खोलना चाहिए, क्योंकि उनका एक-एक शब्द प्रेरणा-शक्ति से परिपूर्ण रहता है। वह मन में पछता रहे थे कि मेरे