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126/ योगिराज श्रीकृष्ण
 


हैं जिनकी सम्मति में यह कहानी पीछे की मिलावट और मूल घटना के विरुद्ध प्रतीत होती है। द्रोण के देहान्त के बाद का भाग सब का सब गप मालूम होता है। कवि को अपनी बात निभाने के लिए पाण्डव शिविर मे झगड़ा करवाने की आवश्यकता प्रतीत हुई। अर्जुन इत्यादि की इस धोखेबाजी पर युधिष्ठिर को धिक्कार और भीम तथा धृष्टद्युम्न द्वारा उनकी सहायता आदि सारे उल्लेख प्रक्षिप्त हैं।