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करने में इसने बहुत भाग लिया है। परन्तु यह बात वस्तु- स्थितिको देखते हुए अनिवार्य थी।

जन, धन और रण सामग्री

मार्चके महोनेतक आन्दोलनके रचनात्मक भागार अधिक ध्यान दिया जाने लगा । ३१ मार्चको बेजवाड़ाम सर्ग भारतीय कमेटोकी बैठक हुई और उसने ऐसे प्रस्ताव स्वीकृत किये जिनमें देशसे यह अनुरोध किया गया कि (१) एक करोड़ रुपया एकत्र किया जाय, (२) एक करोड़ सदस्य बनाये जाय और (३) ३० जून १९२१ तक भारतीय गृहस्थियोंमें २० लाख चरखे चलने लगे। देशने इस कामको बड़े उत्साहसे अपनाया और समय पर एक करोड़से ऊपर रुपया एकत्र हो गया। परन्तु शेष दो बातोंपर पूरा ध्यान नहीं दिया जा सका और उनमें पूर्ण सफलता न हो सकी।

कांग्रेसका रचनात्मक कार्य

१९२१ के शेष महोने में कायमके कामके रचनात्मक मंशका विशेष ध्यान दिया गया और बम्बईमें सर्व भारतीय कांग्रेस कमेटीकी जो बैठक हुई उसमें 'आगामी सितम्बर मासकी ३० वीं तारीखतक विदेशो वस्त्र पूर्ण बहिष्कार कर देने और चरखेको सहायतासे खद्दरकी तैयारी पर विशेष जोर दिया गया। इस उद्देश्यकी सिद्धिके लिये अधीन काग्रेस संस्थाओं तथा काग्रेसके सब सदस्योंके लिये व्यारेवार नियम प्रकाशित किये गये। श्रीमान् प्रिन्स आफ वेल्सको मारतयात्राका बहिष्कार,