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खिलाफतकी समस्या

पेशावर से जमरूद बहुत दूर नहीं है। केवल कुछ आने किराये लगते हैं। इस कुछ आने के लिये उन विना टिकट के महाजरीनों को गाड़ी से उतारने की सैनिक पुलिस की चेष्टा उचित नहीं थी। यह तो पहले से हो अनुमानित था कि दल के दल महाजरीन इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे । परिणाम यह हुआ कि दङ्गा हो गया। एक ब्रिटिश अफसर को भाला लगा। इसपर गोली बली और महाजरीन मारे गये। क्या इस घटना से ब्रिटिश की मर्यादा किसी तरह बढ़ी ' जब सरकारने देखा कि धर्ममें मत- वाले होकर लोग इस तरह प्रवास करनेपर उतारू हो गये हैं और अपना घर छोड़कर विदेशोंमें जा रहे हैं तो उसे उचित था कि सीमा प्रान्त को रक्षा के लिये कुछ चतुर और दूरदर्शी अफसरों को रख देते । इस दुर्घटना का समाचार-कि अंग्रेजो ने गोली चलाई और महाजरीन इसके शिकार बने धीरे-धीरे चारों ओर फैल जायगी बल्कि लोग इसमे और भी निमक मिर्च लगा.कर सुनावेगे। इसका परिणाम यह होगा कि मुसलमानों मे जो असन्तोष बढ़ रहा है वह और भी द्रुतगामी होगा । सूचना पत्र में लिखा है कि सरकार इस मामले की जांच कर रही है। हमें आशा करनी चाहिये कि पूरी तरहसे जांच की जायगी और सरकार ऐसा प्रबन्ध कर देगी जिससे भविष्य में इस तरह की घटनायें न हुआ करेंगी ।

जो लोग असहयोग के विरोधी हैं उनसे हमे इस स्खलपर यही कहना है कि या तो असहयोग को खोकार कीजिये या इस