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पंजाबकी गैर सरकारी रिपोर्ट


शक्ति है। वह पूर्ण स्वच्छन्द है, वह प्रवन्धक सभाके मतके विरुद्ध आचरण कर सकता है। उसको साधारण राय काननसे अधिक बल रखती है। शासनकी नीतिका निर्धारण और संचालन उसके हाथमें रहता है। प्रान्तोंके शासनकी देख रेख और पूर्ण हस्तक्षेपका अधिकार उसके हाथमें है। इसलिये बड़े लाटको अतुल शक्तिशाली. सुदीर्घ सोची और जनप्रिय होना चाहिये। हृदयमें अनेक तरहकी सद्भावनाओं और सुविचारोंके होते हुए भी लाट चेम्स्फोर्डन कठिन समय पर नितान्त कमजोरी दिखलाई है। अपने सहकारियों और अनुयायियोंका संचालन स्वय न करके उन्होंने अपनेको उनके हाथों सौंप दिया और उन्हें मनमाना प्रयोग करने दिया। इसका परिणाम अहमदाबादकी दुर्घटना और पंजाबका हत्याकाण्ड है। यदि प्रधान शासकमे ये गुण वर्तमान होते, यदि वह अपने मातहतोंपर अपना प्रभाव डाल सकते, यदि वह अपने मनसे काम करनेकी योग्यता रखते तो इस प्रकारके प्रतिरोधी बातोंका होना असम्भव था। इस काममें लाडे चेम्स्फोर्डने पूर्ण अयोग्यता दिखाई। इसलिये इस प्रकारके ज्वलन्त उदाहरण उनके सामने होते हुए भी यदि कमे. टीके सदस्य बड़े लाटके वापिस बुलाये जानेकी राय न देते तो वे अपने कर्तव्य पालनसे च्युत समझ जाते।

जिस निर्णयपर कमेटीके सदस्य पहुंचे हैं उसमें यदि कोई दोष है तो कमीकी है। उनकी शिकारिसे और मांगें नितान्त कम हैं। पर अभी इसपर मत देना उचित नहीं। सरकारी