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सविनय अवज्ञा

( जुन ७, १६२० )

यंग इण्डिया के प्रत्येक पाठक कदाचित इस बातको न जानते होंगे कि परसाल की अप्रेल की दुर्घटना के लिये अहमदाबाद के लोगों के ऊपर कड़ा जुर्माना लगाया गया था । यह जुर्माना अहमदाबाद के नागरिकों से वसूल किया गया पर उनमेसे अनेकों को कलकृर ने अपनी इच्छा से बरी कर दिया । इस जुर्माना के देनेवालों मे मालगुजारी देनेवाले ही अधिक थे । और उनसे मालगुजारी की तिहाई रकम जुर्माने में ली गई थी । ऐसे लोगों में मिस्टर वी० जे० पटेल वारिस्टर-एट-ला और डाकृर कनगा थे जो जुर्माना देने मे असमर्थ थे । इन लोगों ने शान्ति स्थापित करने और उपद्रव हटाने में अधिकारियों की बड़ी सहायता की थी । सच्चे सत्याग्रही होते हुए अपनी जान को खतरे में डालकर उन्होंने उपद्रवियों को शान्त करनेको चेष्टा की थी । पर अधिकारी वर्ग उन्हें नहीं बरी कर सकते थे । ऐसी अवस्था में उनके सामने विकट समस्या थी । यह जानकर कि हम लोग दोषी नहीं है, हम लोगों ने शान्ति भंग करने के प्रतिकूल शान्ति स्थापित करने को चेष्टा की थी, ऐसी दशा में जुर्माना कैसे दें और विना कमेटी की आज्ञा के अपने मन से अवज्ञा कैसे करें । वे अधिकारियों के मार्ग में बाधा नहीं उपस्थित करना चाहते थे । पर