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हिंसा और अहिंसा ।

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महात्माजीने २४ मार्च १९२० के यंग इण्डियामें निम्नलिखित लेख लिखा है :-

खिलाफतकी तिथि आई और चली गयी। सत्याग्रहकी विजयका यह ज्वलन्त उदाहरण था अर्थात् सविनय अवज्ञाका नहीं बल्कि सत्य और अहिंसा का। जैसी हड़ताल इस बार हुई कभी नहीं हुई थी। १६ मार्चकी हड़ताल में एक विशेषता यह थी कि इसके लिये किमी तरहको प्रेरणा नहीं की गई थी। १६ मार्चको तो किसीने कही जबानतक नही हिलाई। मिलके मजरोको हड़तालमे शामिल न होनेकी राय देकर खिलाफत कमेटीने अताव दूरदर्शिता और आत्म संयमका परिचय दिया है। कमेटीका प्रबन्ध नितान्त सराहनीय था और हस्तक्षेप न होने देनेका जो यत्न कमेटीने किया था उसके लिये भी वह अति- शय धन्यवादकी पात्र है। जनताने जिस आत्म सयमका परिचय १६ मार्चको दिया है यदि उसी तरहके आत्म संयमका परिचय भविष्यमें दिया. और यदि आत्मत्यागमें भी उसी तरहकी तत्परता दिखाई तो खिलाफतक सम्बन्धमे हम लोगोंकी आशाके फलवती होने में किसी तरहकी वाधा नहीं उपस्थित हो सकती ।