पृष्ठ:यंग इण्डिया.djvu/२२

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बाद ले जाना उचित सममा और उस पत्र का पूरा भार अपने जिम्मे ले लिया। इसतरह यंग इण्डिया साप्ताहिक रूप से अहमदा- पाइसे निकलने लगा। सरकार को कर हुए इस पत्र पर सदा से सपो रही। एक बार किसी लेखको आपत्तिजनक बताकर बम्बई सरकार ने महात्माजी को नोचा दिवाना चाहा ओर मांफी मंगवाने की योजना की। पर महात्माजो साधारण पुरुष नहीं थे। उन्होंने माफी मांगना स्वीकार नहीं किया और मुकदमे की पैरवी की। विचार करने वाले मजिस्ट्रेट को साहस नहीं हुआ कि वह किसो तरहग दण्ड प्रदान कर सके। उसने अदालतको मर्यादा रखने के लिये केवल 'कड़ो चेतावनो' देकर हो छाड़ दिया।

आरम्भमें इस पत्र की मांग इतनी कम थी कि इसे पूरे २५०० प्राहक भी नहीं मिल सकते थे। महात्माजी ने बार बार अपोल की कि इतने से ही इसका व्यय चल सकेगा और इसका जीवन अमर हो जायगा पर कोन फिकर करता था। असहयोग आन्दोलनक जारी हाते हो यंग इण्डिया की मांग बढ़ो और जिस समय महात्माजो गिरफ्तार हुए हैं उस समय प्रति सप्ताह ४०,००० कापियोंको खपत था।

यग इ.एडयाके तीन लेख आपत्तिजनक बतलाये गय और उसके सम्पादक, महात्मा गांधी तथा मुद्रक और प्रकाशक, श्रीयुत शंकरलालजी बैंकर गिरफ्तार कर लिये गये। उनपर मुकदमा चलाया गया और दण्ड दिया गया। इसके बाद यंग इण्डिया का