पृष्ठ:यंग इण्डिया.djvu/१५३

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
( १४६ )


दियेजाते हैं (मान लिया जाय इसके लिये उचित कारण भी हों) और पुनः तैयार होनेके लिये उनसे कहा जाता है, पर उन्हें इस बातका कोई आश्वासन नहीं दिया जाता कि वे इस दूसरी तैयारी पर भी इस विस्तृत देशके किसी एक प्रान्तमें कुछ व्यक्तियोंकी हत्याके कारण पुनः रोक न दिये जायंगे। दो सप्ताह बाद सर्व भारतीय कांग्रेस कमेटीमें सार्वजनिक भाव व्यक्त होनेपर आक्रमणात्मक एवं रक्षणात्मक व्यक्तिगत सविनय अवज्ञाका अधिकार जो प्रान्तीय कांग्रेस कमेटियोसे ले लिया गया था उन्हें पुनः लौटा दिया गया। इसके बाद शीघ्रही महात्माजीको कारावामका दण्ड हुआ और उन्होंने किमी प्रकारके जुलूस इत्यादिका निषेध कर दिया। दिल्लीको बैठकमें स्वीकृत बारडोलो प्रस्तावके सुधारोंसे जनताके दवे हुए भावों तथा रचनात्मक कार्यक्रमको पूरा करनेके लिए काफी चौड़ा द्वार मिल गया था। महात्माजाको जेल यात्राके बाद शीघ्र ही कार्य समितिने इम द्वारको प्रायः बन्दसा कर दिया। दिल्लीकी बैठकमें अनिच्छापूर्वक जो सुविधाएं दी गयो थीं उन्हें प्रान्तीय कांग्रस कमेटियोंसे वापस लेकर रक्षणात्मक एवं आक्रमणात्मक व्यक्तिगत सविनय अवज्ञाके अधिकारोंके जल्दबाजीसे प्रयोगके सम्बन्धमें चेतावनो दे दी गयी। इस प्रकार कार्यकर्तागण जिनका उत्साह भावेशके कारण बढ़ा हुआ था, निरुत्साह - हो बैंठे, क्योंकि कार्यक्रमका वह अंश जो उनके । पुर्द किया गया है, उन्हें उत्साहवर्द्धक प्रतीत नहीं होता और ने इसमें