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मेरी आत्मकहानी
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संरक्षणता और प्रकाशन के संबंध मे किन सिद्धांतों को ध्यान में रखकर काम करे। इस उपसमिति ने एक बडी ही उपयोगी रिपोर्ट तैयार की। अनुसंधान का काम तो इस समिति द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार हो रहा है, पर संरक्षण और प्रकाशन का कार्य व्ययसाध्य है और जब तक इसके लिये पर्याप्त धन न मिले तब तक यह काम सुचारु रूप से नहीं चल सकता।

२२ सितंबर सन् १९१४ में सर जार्ज ग्रियर्सन ने एक पत्र में संयुक्त-प्रदेश की गवर्मेट को लिखा था- "I am unable to agree with those who consider that the reports in their present form are valueless. On the contrary I think that they have very considerable value as works of reference, and I have often used them myself and derived assistance from them.

ऐसा जान पड़ता है कि किसी महोदय ने गवर्मेंट को लिखा था कि ये रिपोर्टें किसी काम की नहीं है, इस काम को बन्द कर देना चाहिए। यद्यपि उस समय अनुमान किया गया था कि यह किस महोदय की कृपा का फल है, तथापि निश्चित बात के जाने बिना किसी का नाम लेना अनुचित है। उनके लिखने पर सर जार्ज ग्रियर्सन से सम्मति ली गई थी तब उन्होने उत्तर देते हुए ऊपर उद्धृत वाक्य लिखे थे।

इस खोज के काम तथा रिपोर्टों की अनेक विद्वानों ने प्रशंसा की है। उनमे से कुछ सम्मतियाँ मैं आगे उद्धत करता हूँ।