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मेरी आत्मकहानी
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१८वीं शताब्दी के लिखे हैं। इस वर्ष में गोरखनाथ के ग्रंथों का तथा जायसी के अखरावट का पहले-पहल पता चला। इन सबका विवरण रिपोर्ट में विस्तार से दिया गया है। इनके अतिरिक्त इस रिपोर्ट में महाराज अनीतसिंह, दादूदयाल, ध्रुवदास, हरिराम, महाराज जसवतसिंह, महाराज मानसिंह, सुन्दरदास आदि के अनेक ग्रंथों का विवरण है। यह रिपोर्ट सन् १९०६ में प्रकाशित हुई।

सन् १९०३ में महाराज काशिराज के पुस्तकालय की जाँच की गई। यह कार्य इस वर्ष समाप्त नहीं हो सका, अतएव रिपोर्ट में कोई विशेष विवरण नहीं दिया गया है। केवल इतना ही लिखा है कि १७७ पुस्तकों की इस वर्ष में जाँच हुई। इनमें से १२७ पुस्तको का पूरा विवरण परिशिष्ट में तथा ५९ का संक्षेप में उल्लेख दिया गया हैं। ये १२७ ग्रंथ ७७ ग्रंथकारों के हैं जिनका समय इस प्रकार है-

१४वीं शताब्दी १ १८वीं शताब्दी २६

१६वीं,,३ १९वीं,,२३

१७वीं,,१८ अज्ञात

अधिकांश ग्रंथों का लिपि-काल १८वीं और १९वीं शताब्दी है। यह रिपोर्ट सन् १९०५ मे प्रकाशित हुई।

सन् १९०४ में १५८ पुस्तको की १७७ प्रतियों की जाँच हुई। इनमें से ११४ पुस्तकों के पूरे नोटिस तैयार किए गए और ४४ प्रतियों का परिशिष्ट में उल्लेख किया गया। १४४ ग्रंथों के ८१