पृष्ठ:मेरी आत्मकहानी.djvu/२६५

यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
२५८
मेरी आत्मकहानी
 


प्रचारिणी सभा तथा भारत-कला-परिषद् को देगी जो उनके वार्षिक विवरणों में सम्मिलित की जायगी।

-कला-मवन के आय-व्यय का समस्त लेखा सभा के बही- खातों में निरतर लिखा जाएगा और उसके आडिटरो-द्वारा यथानियम उसकी जाँच हुआ करेगी। इस बचे हुए हिसाव का एक प्रमाणित चिट्ठा समा प्रतिवर्ष भारत-कला-परिषद् को दिया करेगी।

९-इस भवन के निशुद्ध संग्रहाध्यक्ष (आनरेरी क्यूरेटर) राय कृष्णदास हागे और जब तक वे उस पद को स्वय न छोड़ दें तब तक उस पर बने रहेंगे।

१०-सग्रहाध्यक्ष का पद खाली होने पर समिति दूसरा संग्रहाध्यक किसी नियत काल के लिये चुनेगी और जब-जब आवश्यकता होगी ऐसी नियुक्ति करती रहेगी। एक ही व्यक्ति को एक से अधिक काल के लिये नियुक्ति समिति की इच्छा से हो सकेगी।

११-परिषद् के संग्रह की उन वस्तुओं पर जो मंगनी की हैं यदि मंगनी की कोई शर्त है तो यह नया प्रबध भी उससे सदैव बंधा रहेगा।

१२-परिषद को अपनी प्रकाशित पुस्तको, चित्राधारों वा अन्य प्रकाशनों में संग्रहालय के चित्र आदि प्रकाशित करने का अधिकार रहेगा परंतु सभा को छोडकर किसी भी अन्य व्यक्ति अथवा संस्था को इस बात की अनुमति विना उक्तसमिति की विशेष आज्ञा के न दी जायगी।