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मेरी आत्मकहानी
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जिसके आठ सदस्य होगे। इनमें से तीन भारत-कला-परिषद् की कमिटी तीन वर्षों के लिये चुना करेगी और तीन को काशी- सागरीप्रचारिणी सभा की प्रबंध समिति प्रति तीन वर्षों के लिये चुना करेगी, सातवें सदस्य सभा के प्रधान मंत्री होंगे और राय कृष्णदास आठवें आजीवन सदस्य होगे। उनके न रहने पर षाठवाॅ सदस्य भारत-कला-परिषद् का मंत्री हुआ करेगा। इस समिति को किसी वशेष कार्य के लिये उपसमिति बनाने का अधिकार होगा, जिसमें से उस विषय के जाननेवाले तीन योग्य सदस्यो तक को नियत करने का अधिकार होगा। इस प्रकार सम्मिलित किये हुए सदस्यों की कार्य-अवधि कलाभवन समिति नियत करेंगी। ५-यदि समिति के किसी सदस्य का स्थान किसी कारण से वाली होगा वो उसके लिये अन्य व्यक्ति को वही संस्था चुनेगी जिसने पहले व्यक्ति को चुना होगा । पर किसी अवस्था में एक ही कुटुंव का एक से अधिक व्यक्ति इस समिति का सदस्य न रह सकेगा और यदि किसी सदस्य का स्थान खाली होने पर उसके स्थान की पूर्ति करनेवाली संस्था उस रिक्त स्थान की पूर्ति एक वर्ष के भीतर न करेगी तो दूसरी संस्था को उस स्थान की पूर्ति का अधिकार होगा।

६-कला-भवन की रक्षा और प्रबंध के लिये समिति को कला- परिषद् और काशी-नागरीप्रचारिणी समा से अविरुद्ध नियम, उपनियम आदि वनाने का और उनमें परिवर्तन श्रादि का पूर्ण अधिकार रहेगा।

७-समिति अपने कार्य की एक वार्षिक रिपोर्ट काशी-नागरी- फा १७