राक्षस---जब तक कुमार के बदले महाराज कह कर आपको नहीं पुकार सकते तब तक यह पीड़ा कैसे छूटेगी?*
मलयकेतु---आपने जो प्रतिज्ञा की है तो सब कुछ होगा। परन्तु सब सेना सामन्त के होते भी अब आप किसका आसरा देखते हैं?
राक्षस---किसी बात का नहीं अब चढ़ाई कीजिए।
मलयकेतु---अमात्य! क्या इस समय शत्रु किसी संकट में है।
राक्षस---बड़े।
मलयकेतु---किस संकट में?
राक्षस---मन्त्री सङ्कट मे।
मलयकेतु---मन्त्री सङ्कट तो कोई सङ्कट नहीं है।
राक्षस---और किसी राजा को न हो तो न हो पर चन्द्रगुप्त को तो अवश्य है।
मलयकेतु---आर्य! मेरी जान मे चन्द्रगुप्त को और भी नहीं है,
राक्षस---आपने कैसे जाना कि चन्द्रगुप्त को मन्त्री-संकट नहीं है?
मलयकेतु---क्योकि चन्द्रगुप्त के लोग तो चाणक्य के कारण उससे उदास रहते है, जब चाणक्य ही न रहेगा तब उसके सब कामों को लोग और भी सन्तोष से करेंगे।
राक्षस---कुमार ऐसा नहीं है, क्योकि यहाँ दो प्रकार के लोग हैं एक चन्द्रगुप्त के साथी, दूसरे नन्दकुल के मित्र, उनमें जो चन्द्रगुप्त के साथी हैं उनको चाणक्य ही
- अर्थात् चन्द्रगुप्त को जीत कर जब अापको महाराज बना लेगे
तव स्वस्थ होंगे।