पृष्ठ:माधवराव सप्रे की कहानियाँ.djvu/६४

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उसका यह प्रस्ताव सुनकर देवदूत ने कहा कि "ऐ आजम! तू बड़ा दयावान है। परंतु विचार का स्थान है कि केवल वनस्पति, कंद, मूल और फल से सब प्राणियों का निर्वाह कैसे हो सकेगा। संपूर्ण जीव-सृष्टि के लिए यही आधार बस न होगा। इसीलिये परमेश्वर ने योजना की है कि कई एक पशु जीव-जन्तुओं पर ही अपनी गुजर करते हैं। यदि यह नियम न रहता और सब प्राणियों के लिए केवल अन्न ही का सहारा होता तो मनुष्य का जीवन कठिन हो जाता।"

ऐसी बातें हो रही थी कि इतने में आजम ने देखा कि दो-तीन बिल्लियाँ किसी आदमी के पीछे लगी हुई हैं और पीछे से खूब धूल उड़ रही है। आजम आश्चर्ययुक्त हो देवदूत से पूछने लगा कि, "महाराज! यह आदमी इन क्षुद्र प्राणियों का भय मानकर क्यों भाग रहा है?" उसी समय आजम ने एक और चमत्कार देखा। एक कुत्ता किसी आदमी के पीछे दौड़ रहा है और वह अपने प्राण बचाने के लिए बड़ी व्याकुलता से आश्रय ढूँढ़ रहा है। यह अद्‌भुत प्रकार के दृश्य देखते ही आजम की बुद्धि कुंठित हो गई। तब देवदूत की ओर झुक कर कहने लगा कि "महाराज! यह है भी तो क्या? मेरी समझ में कुछ नहीं आता। कृपा करके मुझे समझाइये।" देवदूत ने कहा, "ऐ आजम! इसमें कोई विशेष चमत्कार नहीं है। यहाँ सब लोग तेरे ही समान बड़े दयावान हैं। कहते हैं कि इन छोटे प्राणियों का मान तोड़कर उनको कष्ट देना ठीक नहीं है। उन्हें उनकी इच्छानुसार चलने देना चाहिए। किसी को थोड़ा-सा भी क्लेश देना बड़ा पाप है। इसीलिये यहाँ के सब जीव-जन्तु इतने प्रबल हो गये हैं और उनका कुल भी इतना बढ़ गया है कि वे किसी की कुछ परवाह नहीं करते और मनुष्य को सदैव त्रास दिया करते हैं।"

आजम ने जवाब दिया, "नहीं महाराज! नहीं!! इन प्राणियों