पृष्ठ:महाभारत-मीमांसा.djvu/६३५

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  • विषय-सूची।

३०७ अन्य संख्या .... ... ... वेदांग ज्योतिषके समय बन्द मह ... ... ... ... ४२८ हुए ... ... ... १२० गृहस्थाश्रमका महत्व ... ... २०६ चान्द्रवर्षसे पाण्डवोंने वनवास ग्रहस्थितिसे युद्धका समय निश्चित पूरा किया ... ... १२२-१२४ करनेका प्रयत्न व्यर्थ है १२६-१२७ चान्द्रवर्ष गणना, द्यूतके आधारपर विरोध वचन और कृट वचन १२८ ___युद्ध के समय प्रचलित थी ... ११७ दो दो नक्षत्रीपर स्थिति .. १३१ । छन्द महाभारतके अनुष्टुप और ग्रहस्थितिका महाभातमें उल्लेख १३७ त्रिष्टुप् ... ... ... ७१ ग्रामसंस्था ... ... ... ३२५ । जन्मेजयकी पापकृत्या ... ... १० प्रीक शब्द सुरंग ... ... ४५ जन्मेजयका ब्रह्महत्यासे सम्बन्ध ५ प्रीकोका दूरका परिचय ई० स० जमाखर्च विभाग ... ... ३२६ पू० ६०० से ... ... ४६ जप ग्रीक, बैक्ट्रियन आदि लोगोंने जमीनका स्वामित्व और पैमाइश ३२१ भारतमें ई० स० पू० ३२० में जम्भक ४४५ गज्य स्थापित किये जय, भारत, महाभारत घोड़सवारोंका दल ... ... ३४७ जरासन्ध यज्ञ पुरुषमेध चतुर्युग ... ... . जातक ४३१ चतुर्गृह भगवद्गीताके बादका है ५४५ जीवकल्पना ... ४७ चतुरंगिणी सेना ... ३४५ जीवका दुःखित्व ४६ चातुर्वर्यकी ऐतिहासिक उत्पत्ति जंगल ३२३ ___ महाभारतका सिद्धांत ... जंबूद्वीपके देश ... चार मनु वैदिक जंबूद्वीपके वर्ष चीन .. ... .. जंवू वृक्ष और मेरु ... चोरीका प्रभाव २८३ ज्योतियंत्र .. ... चन्द्रसूर्यकी नक्षत्रोंमेंसे गति ... ४१६ ज्योतिषका प्रीकोंकी सहायतासे चन्द्रवंशी आर्य, दूसरी पार्योंकी अभ्यास और सिद्धान्तरचना ४८ टोली, सेन्ससरिपोर्ट और ट्रान्सपोर्ट और स्काउट ... ३४६ भाषा भेद ... ... १४४ डायन क्रायसोस्टोम ई० स०पू० चन्द्रवंशियोंका ब्राह्मणकाल और के प्रमाणका कोई युरोपियन महाभारतकालमें उत्कर्ष ... १४ पंडित नाम नहीं लेता ... .. उनके राज्य ... ... १४६ तत्त्वज्ञानके पाँच मार्ग ... ५१७ बान्द्रमासोके भिन्न नाम ... १२१ तत्त्वज्ञानविषयक भारतका महत्व चान्द्रवर्ष मार्गशीर्षादि नामोंके उप- ताम्रपटोंका उल्लेख नहीं है ... रान्त बन्द हो गये ... १२१ तिथि ... ... ४१६ चान्द्रवर्षकी टीकाकारकी “वर्धाप तीर्थ (महाभारतकालीन) ४०३ नादौ" श्रादिकी की हुई व्यवस्था तौल और नाप म्रमपूर्ण है ... .. १२२ त्रिगुण ... .. ४६१ चान्द्रवर्ष भारतवर्ष में कब चलतेथे ११६ दत्तात्रेय ... ... ४५३ ३८७ ३८२ ३१