पृष्ठ:महाभारत-मीमांसा.djvu/२४३

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

® शिक्षा-पद्धति - है या स्त्रियोंके गहने पहनकर नकली नियम था कि गुरुके घर जाकर उन्हें क्लीब बन पाया है। हमारे मतसे यहाँ विद्या अवश्य पढ़नी चाहिये, वैसा स्त्रियोंके पर ऐसा ही गर्भितार्थ लेना चाहिए। लिये न था। इस कारण साधारण स्थिति- कुमारियोंको नृत्य-गान आदि कलाएँ की स्त्रियाँ, अशिक्षित रही होगी। ब्राह्मणों सिखलानेके लिये उतरी हुई अवस्थाके और क्षत्रियोंकी लड़कियाँ, सहज ही पुरुष-शिक्षक ही, साधारण रीति पर, मिलनेवाली शिक्षाके कारण, अधिक रखे जाते होंगे। यह तो स्पष्ट ही है कि सुशिक्षित रही होगी। सिर्फ क्षत्रियोंकी ऐसी शिक्षा साधारण स्त्रियोंको नहीं बेटियोंको ललित-कला सिखलानेके लिए मिल सकती। और यह भी कुछ ज़रूरी उनके घर शिक्षक रखे जाते थे। महा- न था कि स्त्रियाँ पुरुषोंकी भाँति, शिक्षिता भारतके समय स्त्री-शिक्षाकी इस प्रकार- हो ही। पुरुषोंके लिये जिस तरह यह की परिस्थिति देख पड़ती है।