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महाभारतमीमांसा

महाभारतमीमांसा * - - -- -- -- - - - - - के सम्बन्ध अनुशासन पर्वके तीसरे और वैश्य वर्णमें दाखिल हो सकता था। कोई चौथे अध्यायमें एक नवीन कथा है। वह जाति अथवा वर्ण अपना वर्ण या जाति न कथा खास इसी बातको दर्शाती है। युधि- छोड़ सकती थी। कमसे कम चार वर्ष ष्ठिरने अचानक यह प्रश्न किया-“हे भीष्म, तो अभेद्य हो ही गये थे और उनके यदि क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रको ब्राह्मण्य सङ्करसे उपजी हुई जातियोंका भी दुर्लभ है तो फिर विश्वामित्र ब्राह्मण कैसे यही हाल था । इससे समाजमें एक बन गये ? विश्वामित्रका अद्भुत प्रताप है। तरहके झगड़ेका स्वरूप स्थिर हो गया था क्षत्रिय होकर भी वे ऐसे ऐसे काम क्योंकर सही, तथापि ब्राह्मण वर्णको अपनेसे कर सके ? अन्यान्य योनियों में प्रवेश किये नीचेके तीनों वर्गों की स्त्रियाँ प्रहण करने- बिना ही इसी देहसे उन्हें ब्राह्मण्य-प्राप्ति का अधिकार था। इससे प्रकट है कि कैसे हो गई ?" भीष्मने इसका जो उत्तर क्षत्रियोंको नीचेके दो वर्णोंको त्रियाँ दिया है, उसमें यह कथा है कि भृगु ऋषिके ग्रहण करनेका अधिकार रहनेसे समाजमें पुत्र ऋचीकको गाधिकी बेटी ब्याही थी। पूरी पूरी विभन्नता न थी । इसके सिवा गाधिके बेटा न था। तब गाधिकी स्त्री- शुरू शुरूमें ब्राह्मणों की, क्षत्रिय और वैश्य ऋचीककी सास-ने ऋचीकसं पुत्र स्त्रियोंसे उत्पन्न सन्तान भी ब्राह्मण मानी माँगा। इधर ऋचीककी स्त्रीने भी पुत्र : जाती थी। विरोधको घटानेके लिये यह माँगा: तब ऋचीकन दोनोंको मन्त्रित बात अनुकल थी: किन्तु महाभारतके चरु दिया। अपनी स्त्रीको तो ब्रह्म-तंजसे समयमें ही थोडासा सङ्कोच करके तय कर अभिमन्त्रित चर दिया और सासको क्षात्र- दिया गया कि ब्राह्मणकी, ब्राह्मणी और तेजसे मन्त्रित करके चरु दिया। उन . क्षत्रिया स्त्रीसे उत्पन्न सन्तान ब्राह्मण मा-बेटीने अपना अपना चरु अदल होगी । जो सन्तान वैश्य स्त्रीसे हुई उस- बदलकर खा लिया । इस कारण की जाति भिन्न हो गई। . ऋचीककी स्त्रीसे क्षत्रियांशी ब्राह्मण शान्ति पर्वके २४६ वें अध्यायमें वे परशुराम जनमे और गाधिकी स्त्रीके सब जातियाँ गिनाई गई है जो महाभारत- ब्राह्मतेज-युक्त विश्वामित्र हुए । ब्राह्मण- के समय अस्तित्वमें थीं। मुख्य वर्ण चार घंशमे क्षत्रियोंका पराक्रम करनेवाले थे और उनके सङ्कर अथवा मिश्रणके परशुराम कैसे उपजे और क्षत्रियके घर कारण अधिरथ, अम्बष्ठ, उग्र, वैदेह, ब्राह्मणका पराक्रम करनेवाले विश्वामित्र श्वपाक, पुल्कस, स्तेन, निषाद, सूत, क्योंकर हुए, इन दोनों बातोंका खुलासा मगध, प्रायोगव, करण, व्रात्य और यहाँ हो गया। यह खुलासा पीछेसे किया चाण्डाल आदि प्रतिलोम और अनुलोम हुआ जान पड़ता है । पूर्वकालमें क्षत्रियसे । विवाहसे उत्पन्न जातियाँ बतलाई गई ब्राह्मण बन जानेके कुछ उदाहरण हम हैं। इसी अध्यायमें इस प्रश्नका भी प्रारम्भमें दे ही चुके हैं: परन्तु आगे : निर्णय कर दिया गया है कि जातिकी चलकर यह चाल बन्द हो गई होगी। हीनता कर्म पर अवलम्बित रहती है या साफ़ देख पड़ता है कि महाभारतके समय उत्पत्ति पर । साफ़ कहा गया है कि कर्म अन्य जातिका मनुष्य ब्राह्मण न हो ' और उत्पत्ति दोनों कारण मुख्य हैं । "यदि सकता था । न सिर्फ यही, किन्तु न तो किसीके हिस्से में हीन जाति और हीन वैश्य क्षत्रिय हो सकता था और न शद कर्म दोनों श्रागये हो, तो वह जातिकी