पृष्ठ:महाभारत-मीमांसा.djvu/१७७

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  • इतिहास किम लोगोका है

लयमें रहनेवाले लोग हैं जो हिन्दुस्थानमें जलाकर वहाँकी ज़मीनको खेतीके उपयुक्त बिलकुल पीछेसे आये थे, और हस्तिना बनानेके लिए यह उपाय किया गया पुरमें आनेके कारण कौरवोंसे उनका होगा । खाण्डव-वन-दाहकी घटनाको झगड़ा हुआ । यह ऐतिहासिक अनुभव ऐतिहासिक स्वरूप इसी प्रकार दिया जा है कि नये नये आनेवालोकी शाखा सदैव सकेगा । बड़े भारी खाण्डव बनका अधिक उत्साही और तेजस्वी रहती है। विस्तार यमुना किनारे था । वहाँ खब इसके अनुसार पाण्डव भी खूब फुर्तीले घने जङ्गलमें नाग लोग रहते थे। वे और तेज़ थे । धृतराष्ट्रसे उन लोगोंने | आर्योंकी बस्तीको सताते भी थे । इस राज्यका आधा हिस्सा ले लिया । अर्थात् कारण उन्हें सज़ा देकर सारे जङ्गलको राज्यकी पड़ती ज़मीन-यमुनाके पश्चिम जला देने और वहाँकी उपजाऊ ज़मीनको ओरका प्रदेश-उन्हें मिली । वहाँ पर उन बस्तीमें मिला लेनेकी आवश्यकता थी। लोगोंने इन्द्रप्रस्थ नामक राजधानी स्थापित इस कारण उन्हें नाग लोगोंसे युद्ध भी की । इस प्रकार ऐतिहासिक रीतिसे; करना पड़ा। उस बनके नागोंका मुखिया कौरवों और पाण्डवोंकी कथाका मेल नक्षक था । श्रादि पर्वके २२८ वें अध्यायसे मिलता है और यह अनुमान होता है कि ज्ञात होता है कि यह तक्षक अर्जुनके हाथ वह बहुत पुराने ज़मानेकी है। नहीं लगा। इन्द्र उसकी सहायता करता था। इस कारण आकाशवाणी द्वारा कहा नाग लोग। गया कि- “हे इन्द्र ! तृ जिसकी रक्षाके भारती युद्धका सम्बन्ध नाग लोगोंसे लिए इतना उद्योग कर रहा है, वह तेरा भी है। यह कहने में कोई हानि नहीं कि मित्र नागराज तक्षक तो यहाँ है ही नहीं। ये लोग भी ऐतिहासिक हैं। ऋग्वेदमें वह अब कुरुक्षेत्रको चला गया ।" इससे जिन्हें दस्यु या दास कहते हैं, वेयेही होंगे। प्रकट हुआ कि नागोंके राजा तक्षकको ये हिन्दुस्थानके मूल निवासी हैं। इनको दण्ड देनेका अर्जुनका इरादा था। परन्तु सूरत शकल दन्तकथासे हो बदली गई। उस समय वह मिला ही नहीं । वह अपना अर्थात् यह कल्पना पीछेसे की गई होगी देश छोड़कर कुरुक्षेत्रमें चला गया था। कि ये लोग नाग यानी प्रत्यक्ष सर्प हैं। जान पड़ता है कि फिर वह पञ्जाबमें जहाँ जहाँ आर्य लोग आकर बस गये, वहाँ तक्षशिलाके पास बस गया । इन नागोंसे वहाँ नाग लोग पहलेसे ही श्राबाद थे। पाण्डवाका जो बेर शुरू हुआ, वह आगे पाण्डवोको यमुनाके पश्चिमी किनारे पर दो तीन पीढ़ियोतक रहा। इस अनुमानके राज्यका जो हिस्सा मिला वहाँ पर, उस लिए स्थान है कि नागोंने भारती युद्ध में प्रदेशमें, नाग लोग रहते थे। ये लोग पाण्डवोंके विरुद्ध कौरवोंको सहायता बहुत करके जङ्गलोंमें रहते थे और नागों दी थी । क्योंकि कर्णके तरकसमें, खाण्डव की यानी सोकी पूजा किया करते थे। वन-दाहसे भागा हुआ, अश्वसेन नामका राज्य जमानेके लिए पाण्डवोंको ये नाग बाण बना बैठा था। अर्जुन पर इस जङ्गल साफ़ करना पड़ा और वहाँसे | बाणको कर्णने चलाया भी था । पर नागोंको हटाना पड़ा । महाभारतमें निशाना चूक जाने पर वह वृथा गया। खाएउव बन जलानेका जो किस्सा है, तब उसने लोटकर कर्णके कानमें कहा बह इसी प्रकारका है। खाण्डव बनको कि हमें दुवारा चलाओ पर कर्णने यह