पृष्ठ:महादेवभाई की डायरी.djvu/३६७

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

. काम, खेतीका काम, बुनामीका काम, रसोजीका काम, ढोर चरानेका काम या जैसे ही दूसरे काम सब बराबर हैं; और आर मैं समाजको समझा सकूँ तो सब धन्धोंकी भले ही वे पढ़े-लिखोंके हों या बेपढ़कि, मुंशीजीका हो या मेहतरका हो, अक ही कीमत लगाी जाय । यह तो तुम्हें मालूम ही होगा कि अिसी दृष्टिसे जाँच करनेके लिओ आश्रममें आजकल घंटोंका ही हिसाब लिखा जाता है । अिसलिओ अगर फिलहाल बुनाीके लिओ पूरा सूत न मिले, तो यह हरगिज न मानो कि खेती वगैरा दूसरे काम करनेसे तुम किसी भी तरह गिर गये हो ।” को लिखा "... के बारेमें तुम्हें पहले तो अपना मन टटोल लेना चाहिये । क्या तुम्हें अभी विषय भोगने हैं ? अगर यह निश्चय पक्का हो कि नहीं भोगने, तो वह को और मित्रोंको बता देना चाहिये । असा होनेसे को आघात तो जरूर पहुंचेगा, मगर तुम्हारी मजबूतीका असर अन पर बिजलीकी तरह पड़ेगा । मजबुतीका अर्थ यह है कि पागल हो जाय या मर भी जाय, तो तुम्हें सहन करना है । यह भी तुम्हें साफ बता देना चाहिये कि अिसीमें तुम दोनोंका भला है। मगर तुम वहाँ तक न जाओ, तो . . . के साथ बोलना छोड़ दो । और लोग जिस तरह खुदकी पत्नियों के साथ रहते हैं वैसे तुम मूक बन कर रहो और अिस तरह रहते हुओ जितना संयम पाला जा सके अतना पालो। तुम असा करो तो अिसमें तुम्हारी निन्दा करनेका किसीको अधिकार नहीं है । सब अपनी अपनी शक्तिके अनुसार ही आगे बढ़ सकते हैं । बीचकी हालतमें लटके रहना और अपनेको, अपनोंको और दुनियाको धोखा देना जरूर निन्दाके लायक बात है । मिस स्थितिसे बचो । फिर कुशल ही है। ज्यादा विचारके चक्करमें गोते न लगाओ। तुमने विचारोंमें बहुत वर्ष लगा दिये हैं। जल्दीसे अक निश्चय कर लो, तो तुम्हें खूब शान्ति मिल जायगी । व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन का अर्थ यही है । अिस श्लोक पर और असके बाद वालों पर विचार करोगे, तो अिस पत्र पर ज्यादा प्रकाश पड़ेगा ।" गांधी परिवारसे आप क्या आशा रखते हैं ? अिस सवालके जवाबमें : "गांधी कुटुम्बसे मेरी आशा यह है कि सब सेवाकार्यमें ही लगे, भरसक संयम रखें, और धनका लोभ छोड़ दें, विवाहका विचार छोड़ें, विवाहित हों तो भी ब्रह्मचर्य रखें, और सेवासे ही अपना गुजारा करें । सेवाका क्षेत्र मितना लम्बा चौड़ा है कि असमें असंख्य स्त्रीपुरुष समा सकते हैं। अितनेमें सब कुछ आ गया न?" ३४८