पृष्ठ:महात्मा शेख़सादी.djvu/५६

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जब तक तुम्हें पूर्ण विश्वास न हो कि तुम्हारी बात पसन्द आवेगी तब तक बादशाह के सामने किसी की निन्दा मत करो; अन्यथा तुम्हें स्वयं हानि उठानी पड़ेगी।


जो व्यक्ति किसी घमण्डी आदमी को उपदेश करता है, वह ख़ुद नसीहत का मुहताज है।


जो मनुप्य सामर्थ्यवान् हो कर भी भलाई नहीं करता उसे सामर्थ्यहीन होने पर दुःख भोगना पड़ेगा।अत्याचारी का विपद में कोई साथी नहीं होता।


किसी के छिपे हुए ऐब मत खोलो; इससे तुम्हारा भी विश्वास उठजायगा।


विद्या पढ़कर उसका अनुशीलन न करना, ज़मीन जोत कर बीज न डालने के समान है।


जिसकी भुजाओं में बल नहीं है, यदि वह लोहे