पृष्ठ:मध्य हिंदी-व्याकरण.djvu/५९

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( ५६ ) .. १३२ -"निजा' और "पराया” भी सार्वनामिक विशे- षण हैं; क्योंकि इनका भी प्रयोग बहुधा विशेषण के समान होता है। "निज" का अर्थ "अपना” और “पराया" का अर्थ “दूसरे का" है; जैसे, निज देश, निज भाषा, पराया . घर, पराया माल ।

(२) गुणवाचक विशेषण

१३३-गुणवाचक विशेषणों की संख्या और सब विशे-- षणों की अपेक्षा अधिक रहती है। इनके कुछ मुख्य अर्थ · नीचे दिये जाते हैं-

काल-नया, पुराना, भूत, वर्तमान, भविष्य, मौसिमी, अागामी । स्थान-लंबा, चौड़ा, ऊँचा, नीचा, सीधा, सँकरा, भीतरी, बाहरी । आकार-गोल, चौकोर, सुडौल, समान, पोला, सुंदर, नुकीला ! दशा-दुबला, पतला, सोटा, षिवला, गाढ़ा, पीला, स गुण-भलागुण-भला, बुरा, उचित, अनुचित, सच, झूठ, पापी । गुण-भला, बुरा, उचित, अनुचित, सच, झूठ, पापी ।

। १३४-गुणवाचक विशेषणों के साथ हीनता के अर्थ में “सा प्रत्यय जोड़ा जाता है; जैसे, " उसक सा पेड़", "ऊँची सी दीवार ।" "यह चाँदी खोटी सी दिखाई देती है।" उसका सिर भारी सा हो गया"

"उसका सिर भारी सा हो गया ।" . . . . . . १३५-संज्ञाओं में “संबंधी” और “रूपी" शब्द जोड़ने से विशेषण बनते हैं; जैसे, “घर-संबंधी काम," "तृष्णा .. रूपी नदी"।