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१३१ yि इस राज्य के उत्तर और उत्तर-पूर्व में तिब्बत, कहा जाता है कि शिकम पूर्वी तिब्बत (लासा के दक्षिण-पूर्व में भूटान, दक्षिण में दार्जिलिंग का जिला पास ) से आकर यहां बस गये । १७९२ ई० में नेपाल और पश्चिम में नैपाल है। इस राज्य का क्षेत्रफल के गुरखा लोगों ने शिकम पर हमला किया । एक २,८१८ वर्गमील और जनसंख्या १,१०,००० है । यहां चीनी फौज ने उन्हें पीछे हटा दिया। १८१४ ई० में भूटिया, लेपचा और नैपाली लोग रहते हैं । कुछ लोग नैपाल की लड़ाई के समय अंग्रेजों ने शिकम से बौद्ध और कुछ हिन्दू हैं। शिकम होकर तिब्बत की मित्रता कर ली । लड़ाई समाप्त होने पर नैपाल का जो चुम्बी घाटी को सीधा मार्ग गया है । हिमालय की जो पूर्वी भाग लिया गया वह शिकम को दे दिया गया । प्रधान श्रेणी पश्चिम से पूर्व को जाती है वही श्रेणी शिकम ने आगे चलकर दार्जिलिंग का पहाड़ी जिला शिकम और तिब्बत के बीच में सीमा बनाती है। १२,००० रु० वार्षिक के बदले अंग्रेजों को दे दिया । प्रधान श्रेणी से निकल कर दक्षिण की ओर आने पहले यह राज्य बंगाल सरकार की देख भाल वाली सिंह लीला और चोला (पर्वत) शाखायें १९०६ से इसकी देखभाल भारत सरकार के हाथ में है। शिक्रम को नेपाल और भूटान से अलग करती हैं। धान, मकई और छोटी नारंगी यहाँ की प्रधान सिंह लीला पर्वत पर ही २८१४६ फुट ऊँची किंचिं उपज है । यहां होकर कई व्यापार-मार्ग तिब्बत को चिंगा चोटी स्थित है। चोला श्रेणी सिंह लीला से गये हैं। हाल में यहां अच्छी सड़कें भी बन गई हैं। भी अधिक ऊँची है । यह डोक्याला के पास प्रधान सालभर में ४० या ५० लाख रुपये का ब्यापार हो श्रेणी से अलग होती है। जाता है । इस राज्य की आमदनी ५३ लाख रुपये है। था। भूटान हिमालय की प्रधान श्रेणी और बंगाल तथा और भाग अँग्रेजी राज्य में मिला लिया गया। लेकिन आसाम के मैदान के बीच में भूटान का पहाड़ी राज्य इसके बदले में भूटान को हर साल ५०,००० रु० पूर्व से पश्चिम तक १४० मील लम्बा है । इसका क्षेत्र- मिलने लगा । १९०४ ई० में जब ब्रिटिश फौज ने फल १८,००० वर्गमील और जन-संख्या ३ लाख है । लासा (तिब्बत ) पर चढ़ाई की तब भूटान ने बड़ी भूटान के पहाड़ी ढालों पर सिन्दूर, बांझ देवदार मदद दी । भूटान में सड़क की पैमायस हो गई। और आदि कई तरह के पेड़ों के बन हैं। ऊँची उपजाऊ भूटान का राजा फौज के साथ गया । उसने तिब्बत घाटियों में धान और मक्का की खेती होती है । पहले और ब्रिटेन में सन्धि करवा दी। १९१० से भूटान भूटान में टेकपा लोग रहते थे। १६५० ई० के लगभग को १ लाख रुपया मिलने लगा। भूटान ने विदेशी यहां तिब्बत के लोग आ डटे। १७७२ ई० में जब नीति ब्रिटेन को सौंप दी और ब्रिटिश एजेन्ट अपने भूटिया लोगों ने कूच बिहार के राजा पर चढ़ाई की यहां रख लिया। तो उसने अंग्रेजों से सहायता मांगी। भूटानियों ने भूटान में धर्म-राजा धार्मिक मामलों का प्रबन्ध आसाम पर भी कई हमले किये । जो अंग्रेजी राजदूत करते हैं । वे बुद्ध भगवान के अवतार माने जाते हैं। उनके दरबार में गया उसने सन्धि पर हस्ताक्षर कर धर्म राजा मरने पर दो वर्ष तक प्रतीक्षा की जाती दिये जिससे आसाम के द्वार (प्रदेश ) भूटान को है। इसी बीच में राजवंश में जो बालक पैदा होता मिल गये । लेकिन अंग्रेजी राजदूत के लौटने पर है वह धर्म राजा माना जाता है । भूटानियों के विश्वास सन्धि तोड़ दी गई और द्वार के प्रदेश अंग्रेजी के अनुसार धर्म राज भूटान के राजवंश में ही जन्म राज्य में मिला लिये गये । १८६५ में भूटान का कुछ लेता है । देवराजा देश का प्रबन्ध करता है।