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भाव-विलास

 

उदाहरण
सवैया

आपनोई अपमान कियो, पहिराइवे को मनिमाल मंगाई।
लै मिलई मिस सों कुसखी, करि, पाय परेऊ न प्रीति जगाई॥
केतिक कौतिक बाते कहीं, कविदेव तउ तिय तोरी सगाई।
आजु अचानक आइ लला, डरवाइ कें राधिका कण्ठ लगाई॥

शब्दार्थ—मनिमाला—मणिमाला। केतिक—कितनीही। अचानक—अकस्मात।

दोहा

या बिधि छऊ उपाय हैं, न्यारे न्यारे जान।
लाघव तें एकत्र ही, सबको कियो बखान॥
देसकाल सबिशेष लखि, देखि नृत्य सुनि गान।
जातु मनाये हूं बिना, मानितीनु कौ मान॥

शब्दार्थ—लाघव तें—संक्षेप में।

भावार्थ—इस तरह मनमोचन के अलग अलग छः उपाय हैं जो संक्षेप में एक जगह वर्णन कर दिए गये हैं। देस काल आदि को देखकर अथवा नृत्य गीतादि को देख-सुनकर बिना मनाये भी, मानिनियों का मान चला जाता है।

सवैया

रूठिरही दिन द्वैक तें भामिनि, मानी नहीं हरि हारे मनाइकै।
एक दिना कहूँ कारी अंधारी, घटा घिरि आई घनी घहराइकै॥