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नायक नायिका विचार
दोहा

भाव सहित सिंगार कौ, जो कहियतु आधारु।
सो है नायक नायिका, ताको करत बिचारु॥

शब्दार्थ—आधारू–आधार।

भावार्थ—शृंगार रस के आधार नायक और नायिका माने गये हैं। अब यहाँ उन्हीं का वर्णन किया जाता है।

नायक भेद
दोहा

नायक कहियतु चारि बिधि, सुनत जात सब खेद।
चौरासी अरु तीन सै, कहत नायिका भेद॥
प्रथम होइ अनुकूल अरु, दक्षिन अरु सठ धृष्ट।
या बिधि नायक चारि बिधि, बरनत ज्ञान गरिष्ट॥

शब्दार्थ—सरल है।

भावार्थ—नायक के चार तथा नायिकाओं के ३८४ भेद होते हैं। नायकों के चार भेदों मे पहला अनुकूल, दूसरा दक्षिण, तीसरा शठ और चौथा धृष्ट है।