पृष्ठ:भारत में इस्लाम.djvu/९७

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जिसमें ऊद रखकर जलाया जाता है) थे--जिनमें प्रति दिवस ऊद जलाया जाता था। इस कमरे में चारों तरफ भिन्न-भिन्न प्रकार के पत्थर लगे थे। मकबरे के बाहर बाग़ में बहुत से मुल्ला कुरान पड़ रहे थे। खुद गुम्मद के बाहर की तरफ़ सबसे ऊँची चोटी पर एक गुम्मद था और इसपर गिलट का बना हुआ दीनर था। मुझे एक सबसे बढ़कर आश्चर्य इस बात पर था कि इन चित्रों के होने की तह में क्या कारण था और बहुत सोचने के पश्चात् यही फल निकाल सका कि इसका मज़हब नहीं था बल्कि चूँकि यह वस्तुएँ उन दिनों में अद्भुत गिनी जाती थीं इसीलिए ऐसा किया गया था। जिन दिनों में औरंगजेब शिवाजी से लड़ रहा था तो सन् १६९१ ई० में विद्रोही देहातियों ने मकबरे में घुसकर तमाम मूल्यवान् पत्थर और सुनहरी काम चुरा लिया और बादशाह की हड्डियों को मकबरे में से निकाल कर जला डाला।"

जहाँगीर

अकबर के पुत्र जहाँगीर ने बाईस वर्ष राज्य किया। वह शराबी, ऐयाश और निष्ठुर था, पर राज्य शासन उसने बड़ी ही चतुराई और तत्परता से किया। उसके काल में राज्य में कला कौशल, व्यवस्था और शान्ति रही। मलिका नूरजहाँ का भी इस शासन में भारी हाथ रहा।

उसके गद्दी पर बैठने के बाद ही उसके पुत्र खुशरू ने विद्रोह किया, पर उसे क़ैद कर लिया गया और उसके साथी क़त्ल करा दिये गये। इसने उदयपुर के राणा से सन्धि की और उसका पद दर्बार में जहाँगीर से दूसरा नियत किया। इसी के शासनकाल में इङ्गलैंड का दूत टामस रो भारत में आया, और अपनी कम्पनी के लिये व्यापार का अधिकार प्राप्त किया। इस विदेशी यात्री ने अपने अनुभव से जो कुछ लिखा है उसका अर्थ यह है---

"राजसभा की विशालता और वैभव आश्चर्ययुक्त है, पर सरदार क़र्जदार हैं। प्रबन्ध सदोष है, किसान दरिद्र हैं, कुशासन के चिह्न देश में हैं, प्रजा का वैभव नष्ट हो रहा है। ठगों और डाकुओं के जुल्मों से गाँव और पब्लिक अरक्षित है। बहुत सी भूमि जङ्गल है, दक्षिण के नगर खण्डहर हो रहे हैं। जो प्रान्त राजधानी से दूर हैं उनकी हालत निकृष्ट है।"

वह एक अद्भुत ऐयाश और खुशमिजाज तबियत का आदमी था।