पृष्ठ:भारत में अंगरेज़ी राज - पहली जिल्द.djvu/५४३

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पहला मराठा युध्द

पहला मराठा युद्ध २७३ सूरत में मॉस्टिन की चाले कुछ दिनों तक न चल सकी। इतिहास लेखक मिल लिखता है कि थोड़े दिनों की बातचीत के बाद मॉस्टिन ने देख लिया कि साष्टी और बसई इतनी आसानी से मिल सकेंगे। फिर भी मॉस्टिन के प्रयत्न जारी रहे । सब से पहले उसने राघोवा और नाना फड़नवीस को एक दूसरे से अंगरेज़ दूत मॉस्टिन फोडने की कोशिश की। पेशवा माधोराव बालिग की करतूतें हो गया था। तब भी राघोबा मॉस्टिन के कहने में आकर उसे नाना के प्रभाव से हटाकर अपने प्रभाव में रखने की चेष्टा करता रहा। धीरे धीरे माधोराव और राघोवा में अनवन इतनी बढ़ गई कि एक बार माधोराव ने विवश होकर अपने चचा राघोबा को कैद कर दिया। शीघ्र ही राघोबा फिर छोड़ दिया गया । इतने में १८ नवम्बर सन् १७७२ को २८ साल की अल्प आयु में माधो राव की मृत्यु हो गई। माधोराव की मृत्यु मराठा साम्राज्य के लिए बड़े दुर्भाग्य की घटना थी। इस नौजवान पेशवा को मौत का जिक करते हुए ग्राण्ट डफ़ लिखता है:- “द्र दूर तक फैले हुए मराठा साम्राज्य के उस वृक्ष को, जिसे कुछ हानि पहले ही पहुँच चुकी थी, जो जड़ नीचे से रस पहुँचाती थी वह तने से कटकर अलग हो गई। उस साम्राज्य को पानीपत के मैदान से भी इतना धक्का न पहुँचा था जितना इस सुयोग्य शासक की अकाल मृत्यु से पहुंचा। माधोराव युद्ध विद्या मे तो अत्यन्त चतुर था ही, नरेश की हैसियत