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भारत में अंगरेज़ी राज

६१४ भारत में अंगरेजी राज इंगलिस्तान के व्यापार को फैलाने और कच्चे माल को बाहर ले जाने के लिए भारत भर में रेलों का जाल पूर दिया गया। दूसरे देशों को पराधीन करने और उनको पराधीनता को बनाए रखने में मिश्र, भारत, चीन, मञ्चरिया, कोरिया और साइबेरिया में सब जगह रेलों ने बहुत ज़बरदस्त काम किया है। सन् २०१३ का नया 'चारटर' भारतवासियों के लिए केवल श्रार्थिक दृष्टि से ही घातक न था, नैतिक गृष्टि भारतवासियों से भी वह भारतवासियों के अधिकाधिक पतन में शराब का का कारण हुआ । भारतीय जीवन की सरलता प्रचार और शुद्धता को भङ्ग करने ही में उस समय के धन-लोलुप अंगरेज व्यापारियों को अपना हित दिखाई देता था। सन् १८३२ की पार्लिमेण्टरी कमेटी के सामने जो गवाह पेश हुए उनमें से एक मिस्टर ब्रेकन ने अपने बयान में कहा- "अब कलकत्ते में उन हिन्दोस्तानियों के अन्दर, जो शराब पर खर्च कर सकते हैं, तरह तरह की शराबें बहुत बड़ी मिकदार में खपतो हैं।" इसी गवाह ने एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में कहा- “मैंने कलकत्ते के एक दशो दूकानदार से, जो वहाँ के बड़े से बड़े खुफ़िरोशों में से है, सुना है कि उसके शराबों, प्राण्डी और बियर, के ग्राहकों में से अधिकांश ग्राहक हिन्दोस्तानी हैं।" इस गवाह से पूछा गया कि-हिन्दोस्तानियों को कोन सी शराब सब से ज़्यादा पसन्द है ? उसने उत्तर दिया-शैम्पेन । फिर