पृष्ठ:भारत में अंगरेज़ी राज (दूसरी जिल्द).djvu/३३८

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जसवन्तराव होलकर

जसवन्तराव होलकर ७४७ की सेना होलकर के सामने पीछे हटती चली जा रही है और मुकन्दरा दरै को छोड़ कर चली आई है।" "यह स्थिति बहुत ही दुखदायी है । बिना ज़ोरदार प्रयत्न किए हमारी इज्ज़त किसी तरह फिर से कायम नहीं हो सकती । मुझे डर है कि जितनी हानि हमारी हो चुकी है, अब हम कितनी भी कोशिश क्यों न करें, उसे पूरा करने का समय निकल चुका।" इसके बाद गवरनर जनरल ने जनरल लेक को सलाह दी- "जो पत्र प्राज मिले हैं उनसे मालूम होता है कि जब तक फिर आप स्वयं सेना सहित जाकर होलकर पर ज़ोरों से हमला न करेंगे, सफलता की कोई आशा नहीं रहो x x x"18 १७ अगस्त को वेल्सली ने लेक को लिखा- "पिछला पत्र लिखने के बाद मालूम हुआ है कि करनल मॉनसन को सेना अपनी तोपें, सामान इत्यादि सब खोकर, बड़ी मुसीबत की हालत में मालवा प्रदेश को बिलकुल छोड कर चली आई।""


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  • "By a letter just received (half past 4 o'clock p m ) from Lieut

Colonel Lake to Captain Armstrong, dated 20th July, it appears that Colonel Monson's detachment was retreating before Holkar, and had guitted Mucundra Pass ____“This is a Inost painful state of affairs Nothing can retrieve our character but the most vigorous effort I fear that all our exertions will now be too late to recover all we have lost ___“The despatches received today seem to leave no hope of success unless the Commander-in-Chief can again take the field in person, and attack Holkar with vigour, "-Governor General's "Most Secret and Confidential" "Notes" to General Lake, dated 28th July, 1804 +"Since the date of my last notes, it appears that Colonel Monson's