पृष्ठ:भारत में अंगरेज़ी राज (दूसरी जिल्द).djvu/३०५

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७१४
भारत में अंगरेज़ी राज

७१४ भारत में अंगरेज़ीराज पत्र और उसके साथ अपने २८ दिसम्बर के “प्राइवेट" पत्र में गवरनर जनरल को लिखा- ____ "इस पत्र के साथ आपको होखकर का एक पत्र मिलेगा; और मैं यह जान कर प्रसन्न है कि होलकर हमारे साथ मित्रता कायम रखना चाहता है।xxx "मैं जल्दी में लिख रहा हूँ, xxx होलकर के विषय में मैं मापकी राय और भापका पादेश जानना चाहता हूँ।" जनरल लेक को अपने "गुप्त उपाय” पर पूरा विश्वास था, सीधिया के विरुद्ध उन्हें परख चुका था और अब वह होलकर से युद्ध छेड़ने के लिए लालायित था। मार्किस वेल्सली ने जनरल लेक के उत्तर में १७ जनवरी सन् १८०४ को एक "गुप्त" पत्र लिखा, जिसके कुछ वाक्य ये हैं - "आपके ११,२८और २६ दिसम्बर सन् १८०३ के पत्र पहुँचे । xxx "जिन पत्रों को नकलें जसन्तराव होलकर ने आपके पास भेजी है वे मेजर जनरल वेल्सली ने अवश्य अपने नाम से ही होलकर के पास भेजे होंगे। मैंने जसवन्सराव होलकर को कोई पत्र नहीं लिखा, किन्तु मैंने अपनी २६ जून की हिदायतों में मेजर जनरल वेल्सली को यह अधिकार दिया था कि पाप जसवन्तराब के साथ मित्रता का पत्र व्यवहार शुरू करें । "अब यह उचित है कि जसवन्तराव होलकर की ओर हम अपना व्यवहार निश्चित कर लें।