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भारत में अंगरेज़ी राज

१२ भारत में अंगरेज़ी राज लेकर आपके हवाले कर देंगे और सदा श्रापके सहायक रहेंगे। इसके बाद जनरल बेल्सली ने गवरनर जनरल के कहने से जसवन्तराव को कई पत्र लिखे, जिनमें उसने जसवन्तराव से वादा किया कि युद्ध समाप्त होने के बाद गंगा और जमना के बीच के बारह जिले, दक्खिन के कुछ जिले और बुन्देलखण्ड और उत्तरी भारत का कुछ और इलाका, जो पहले होलकर राज में रह चुका था, सब आपको दे दिया जायगा। दोनों वेल्सली भाइयों ने अपने छपे हुए पत्रों में इन पत्रों का लिखना स्वीकार किया है। इन झूठे वादों से अंगरेजों का अभिप्राय उस समय केवल यह था कि जसवन्तराव अंगरेजों के विरुद्ध सींधिया और भोंसले की सहायता न करे । जनरल वेल्सली और जनरल लेक ने अपने पत्रो में यह भी स्वीकार किया है कि यदि जसवन्तराव होलकर सींधिया की मदद के लिए पहुँच जाता, तो वेल्सली के लिए प्रसाई और अरगाँव के मैदान जीत सकना या लेक के लिए आगरा और लसवाड़ी में विजय प्राप्त कर सकना बिल्कुल असम्भव होता। किन्तु सींधिया और भोसले दोनों पर विजय प्राप्त करते ही जसवन्तराद के र अंगरेज़ों ने एकाएक जसवन्तराव की ओर अपना M रुख बदल दिया। वास्तव में इस युद्ध के समाप्त होने से पहले ही अंगरेजो ने जसवन्तराव को भी कुचलने का इरादा कर लिया था। १२ दिसम्बर सन् १८०३ को जनरल वेल्सली ने मार्किल वेल्सली के प्राइवेट सेक्रेटरी मेजर शॉ को एक पत्र में लिखा- साथ सलक