पृष्ठ:भारत में अंगरेज़ी राज (दूसरी जिल्द).djvu/१९६

यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।
६०७
दूसरे मराठा युद्ध का प्रारम्भ

दूसरे मराठा युद्ध का प्रारम्भ पाप पूना न जाइए और उधर करमल कोज और जनरल वेल्सली ने बाजीराव पर दबाव डालना शुरू किया कि सीधिया को पूना शाप दौलतराव को लिख दीजिए कि तुम पूना जाने से रोकना 'मानो। १० मई सन् १८०३ को अरमन वेल्सली ने जनरल स्टुअर्ट को लिखा- "करमख कोखिम्स का इरादा है कि पेशवा पर इस बात के लिए जोर दिया जाब कि वह सींधिया को बिच भेजे कि तुम पूना न मानो और मैं सोचता हूँ, मुझे भी कॉलिन्स को इस प्राशन का एक पत्र लिख देना चाहिए कि पेशवा को इच्छा है कि सीधिया पूना न पाए चौर उचित यह है कि पेशवा की इस इच्छा के अनुसार कार्य हो।" १० मई तक बाजीराव पूना पहुँचा भी मथा। और पूना पहुँचने के बाद भी उसने दौलतराव को पूना बुलाने के लिए कई बार पत्र लिखे, किन्तु अपने मतलब के लिए साफ झूठ बोलना जनरल वेल्सली और उस समय के अन्य अंगरेजों के लिए एक मामूली बात थी। दूसरी ओर नए युद्ध के लिए अंगरेजों की तैयारी जारी थी। करनल कॉलिम्स सींधिया दरबार में अपनी साजिशों का जाल इतनी अच्छी तरह फैला खुका था कि अब वह युद्ध के छिड़ने के लिए अधीर हो रहा था। किन्तु माकित घेल्सली और जनरल वेल्सली अभी तक अपनी तैयारी पूरी न कर पाए थे। जनरल • "Colonel Collins intends to press the Peshwa to desxe Scindhia not to advance to Poona, and I think that, I ought to write him a letter to say that such as the Peshwa's wish, and that it is proper it should be com- phed wish,"-Major General Wellesly's letter to Lt-General Stuart, dated 10th May, 1803