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सतीप्रताप


बनदेवी--प्यारे ! चलो हम लोग इस कुंज की आड़ में से इन दोनों के पवित्र प्रेम-पुरान को सुनकर अपना जीवन चरितार्थ करै।

(दोनों कुंज की ओट में छिपते हैं)

(पटाक्षेप)


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