पृष्ठ:भारतवर्ष का इतिहास भाग 1.djvu/१३१

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भारतवर्षका इतिहास इसके अतिरिक्त यह यात भी प्रमाणित (ग) दशमलव और मौखिक विद्या। हो चुकी है कि दशमलव और मीषिक- गणित भी पार्थ लोगोंका ही आविष्कार है। अरववालोंने इसे भारतीयोंसे सीखा और फिर यह यूरोपमें फैला । दर्शन। 2 इन सय सूत्रोंके अतिरिक आर्योके पट शास्त्र हैं। दर्शनका अर्थ है आयना। मानो ये सूत्र प्रत्येक मनुष्यके लिये दर्पणका काम देते हैं। इन छ: दर्शनोंमें आर्यों का तत्व ज्ञान और तर्क भरा हुआ है। ये छः दर्शन बहुत प्रसिद्ध और प्राचीन हैं। इनके विषय बड़े गहन और सूक्ष्म है। वाक्य रचना निहायत संक्षिप्त और ऐसी कारीगरी की है कि एक शब्द भी घट बढ़ नहीं सकता। पहला सबसे पुराना दर्शन फपिलका बनाया हुआ सांख्य-शास्त्र है। इस दर्शनमें यह सिद्ध किया गया है कि जीव और प्रकृति दो अनादि पदार्थ हैं। इनका कभी नाश नहीं होता। इस दर्शन. पर सबसे प्रसिद्ध टीका भागुरि मुनिकी है। दूसरा-पतञ्जलिका योग-दर्शन है। इसमें परमात्माको भक्ति और गुणोंका वर्णन है। इसमें उपासनाकी रीतियां भी यत. लाई गई हैं। योगविद्यापर सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ यही है। सभी योगी इसका प्रमाण देते हैं। इसपर सबसे प्रामाणिक भाप्य व्यास मुनिका है। तीसरा-गोतमका न्याय दर्शन है। गोतमको भारतका मास्तू कहते हैं। न्याय मानो माय लोगोंका तर्क-शास्त्र है। संसारमें तर्क-विद्या सबसे पहले मायाका आविष्कार है। इसपर सबसे उत्तम भाप्य वात्स्यायन मुनिका है।