पृष्ठ:भारतवर्ष का इतिहास.djvu/६२

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५—सिकन्दर की आयु २० बरस की थी। फिर भी यह पृथ्वी के बीर धीर योद्धाओं में गिना जाता था और अब तक सिकन्दर महान के नाम से प्रसिद्ध है। इसने कुल एशियाई तुर्की और फारस को विजय किया और फ़ारस के राजा दारा से जितनी लड़ाई लड़ा सब जीतता गया। इसके पीछे तुर्किस्तान अफ़गानिस्तान पर विजय पाता हुआ खैबर दर्रे से जिधर से किसी समय में आर्य लोग पंजाब में आये थे इसने भारत में प्रवेश किया।

६—पंजाब का पौरव नाम एक क्षत्रिय राजा सिकन्दर को जीतने की आशा से उसके सम्मुख आया। झेलम नदी के तट पर महा घोर युद्ध हुआ पर सिकन्दर और उसके यूनानी योद्धाओं ने पौरव और उसके सिपाहियों को हरा दिया। जब लड़ाई बन्द हो गई तब बन्दियों के समान पौरव सिकन्दर के सम्मुख उपस्थित किया गया। सिकन्दर ने पूछा कि तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाय। पौरव ने उत्तर दिया कि जैसा राजा राजाओं के साथ करते हैं। सिकन्दर इस उत्तर से प्रसन्न हुआ और उसका राज उसे लौटा दिया।

७—सिकन्दर चाहता था कि गंगा नदी के तरेटी की ओर बढ़े और सब भारतवर्ष को जीत ले परन्तु उसके सिपाही व्याकुल हो गये थे और वह यूनान को ही लौटना चाहते थे। इस लिए सिकन्दर को उलटा लौटना पड़ा। एशियाई तुर्की के बाबुल नगर में पहुंच कर उसे ज्वर आ गया और वह मर गया।

८—सिकन्दर के मरने के पीछे उसका बड़ा राज्य उसके सेनापतियों में बंट गया। पहिला यूनानी सेनापति जो सिकन्दर की मृत्यु के पीछे बाख़र का हाकिम हुआ मलयकेतु था। इसने पंजाब को अपने आधीन रखने का उपाय किया किन्तु सिकन्दर के भारत से लौट जाने के पीछे मगध के प्रसिद्ध राजा चन्द्रगुप्त ने