पृष्ठ:भारतवर्ष का इतिहास.djvu/१८१

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इस कारण उसको कोई रोक टोक न करता था। लोग अनुमान करते हैं कि गुलाब का इत्र नूरजहां ही ने निकाला। हम्माम के हौज़ों में गुलाब के फूल भरे रहा करते थे। मलका ने एक दिन पानी के ऊपर कुछ तेल सा तरता हुआ देखा। बस मलका को इत्र बनाने की रीति सूझ गई और तब से गुलाब का इत्र तैयार होने लगा।

७—यह भी जहांगीर और भारतवर्ष के अच्छे कर्मों का फल था कि मलका राज्य के प्रबंध में ऐसी चतुर थी, नहीं तो जहांगीर में न तो अकबर के समान बुद्धि थी और न उसका सा स्वभाव था। इसको सिवाय आराम और खुशी के और किसी बात का ध्यान ही न था। मुग़ल बादशाहों में इसके समान शराबी और आराम तलब कोई और नहीं हुआ।

८—भारतवर्ष के मुग़ल बादशाहों की चर्चा इङ्गलैंड में भी पहुंच गई थी। जहांगीर को वहां "बड़ा मोगल" कहते थे। १६१५ ई॰ में इङ्गलैंड के बादशाह पहिले जेम्स ने जहांगीर के पास एक राजदूत भेजा जिसका नाम सर टामस रो था। उसकी इच्छा यह थी कि अङ्गरेज़ी सौदागरों को भारतवर्ष में व्यापार करने की आज्ञा मिल जाय। उस समय सूरत बन्दर में अङ्गरेज़ी सौदागरों की एक कोठी थी। सर टामस रो जहांगीर के दर्बार में तीन बरस रहा। उसने जो कुछ वृत्तान्त भारतवर्ष का सुना या देखा था लिख डाला। सर टामस रो का कथन है कि राज्य का प्रबंध ऐसा अच्छा न था जैसा अकबर के समय में था। सूबेदार प्रजा को सताते थे। देश में डाकुओं और लुटेरों ने बड़ा गड़बड़ मचा रक्खा था। जब तक बचाव के निमित्त पूरा जङ्गी सामान न रहता यात्रा करना बड़े जोखिम का काम था। सर टामस रो बादशाह के मुजरे के निमित्त दर्बार में जाया करता था। बादशाह एक