पृष्ठ:भारतवर्ष का इतिहास.djvu/१००

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राजधानी एक नगर लखनौती था। अफ़गानों ने बदल कर अपने देश के नाम पर इसको ग़ोर की पदवी दी और वह बिगड़ कर गौड़ बङ्गाला हो गया। बूढ़ा बङ्गाली राजा लक्ष्मणसेन बड़ी कठिनाई से ग़ोरियोंके हाथ से बचा। वह खाना खा रहा था जब अफ़गान महलों में घुस आये और उसे पकड़ ही लेते कि वह एक चोर दरवाज़े से निकल भागा और उड़ैसा पहुंचा। वहां उसने अपना जन्म जगन्नाथ की सेवा में बिता दिया। इसके पीछे ग़ोरियों ने पहिले गुजरात के बघेले राजपूतों को परास्त किया फिर गवालियर ले लिया; पर मालवा न जीत सके।

९—भारत की अन्तिम लड़ाई के पीछे महम्मद ग़ोरी पञ्जाब की राह अपने देश को लौटा जा रहा था कि एक पहाड़ी जाति के लोग जिन्हैं घखर कहते हैं रातको इसके डेरे पर टूट पड़े और इसको मार डाला। गोरी के साथी इसकी लाश को ग़जनी ले गये और वहीं उसे गाड़ दी। उसके पीछे उसका नायब कुतुबुद्दीन भारत के जीते हुए प्रान्तों का स्वतंत्र अधिकारी होकर दिल्ली का सुलतान बन गया। महम्मद ग़ोरी भारत का पहिला जीतनेवाला था। महमूद ग़जनवी की नाईं इसका अभिप्राय यह न था कि लूट खसोट कर ग़ज़नी में जा बैठे। यह भारत पर शासन करने आया था और इसकी मनोकामना पूरी हुई।


२२—पठान बादशाह।
(१२०६ ई॰ से १५२६ ई॰ तक)

१—१२०६ से १५२६ ई॰ तक ३२० बरस अफ़ग़ान बादशाहों ने दिल्ली में राज किया। इन में बहुतेरे पठान वंश के थे इस से हिन्दू सब को पठान कहते हैं। यह लोग अफ़गानिस्तान