पृष्ठ:बृहदारण्यकोपनिषद् सटीक.djvu/७०५

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अध्याय ६ब्राह्मण २ .. पदच्छेदः। अथ, एनम् , वसत्या, उपमन्त्रयाञ्चक्रे, अनादृत्य; वसतिं, कुमारः, प्रदुद्राव, सः, श्राजगाम, पितरम् , तम् , ह, उवाच, इति, वाच, किल, नः, भवान् , पुरा, अनुशिष्टान् , अवोचत, इति, कथम् , सुमेधः, इति, पञ्च, मा, प्रश्नान् , राजन्यबन्धुः, अप्राक्षात् , ततः, न, एकम् , चन, वेद, इति, कतमे, ते, इति, इमे, इति, ह, प्रतीकानि, उदाजहार ॥ अन्वय-पदार्थ। अथ इसके उपरान्त । एनम् श्वेतकेतु से । वसत्या-अपने निकट वास करने के लिये । + प्रवाहणा-राजा प्रवाहण ने । उपमन्त्रयाञ्चके-कहा।+ परन्तु-परन्तु । सा-वह । कुमार: कुमार श्वेतकेतु । वसतिम्वास को । अनादृत्य-निरादर करके । प्रदुद्राव-धपने घर को चला गया च और । पितरम्-पिता के पास । श्राजगाम-पहुँचा।+च-और । ह= स्पष्ट । तम्-उस अपने पिता से । इति-ऐसा । उवाच कहने लगा कि । पुरा-पहिले । भवान्यापने । न मुझको । अनुशिष्टान्-शिक्षा दिया हुआ । अवोचत कहा था वाव किल-क्या यह वात नहीं है । + पिता-पिता ने । + उवाचकहा । सुमेधा हे मेरे बुद्धिमान् पुत्र ! । कथम् कैसे । इति=ऐसा तू कहता है ।+ पुत्र:=पुत्र । + उवाच-बोला। राजन्यवन्धुःप्रवाहण राजा । मा-मुझसे । पञ्च-पांच । प्रश्नान प्रश्नों को । अप्राक्षीत्-पूछता भया । + परन्तु परन्तु । ततः उनमें से । एकम्-एक । चन-भी प्रश्न को । अहम् मैंने । न-नहीं । वेद जान पाया। + पिता-पिता । उवाच बोला । ते वे प्रश्न । कतमे कौन से हैं । + तदा-तब । + पुत्रः उवाच-पुत्र कहता भया । ते वे प्रश्न | इमे ये हैं। 1