पृष्ठ:बुद्ध और बौद्ध धर्म.djvu/१७

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बुद्ध और बौद्ध धर्म १४ मेरे भवन के भीतर और बाहर, देश की सीमा में और सीमा के बाहर-बहुत-से मेरे शरीर-रक्षक थे । और इस प्रकार रक्षा की जाने पर भी मैं भय, चिन्ता और सन्देह का पात्र बना हुआ था; किन्तु अब, जबकि मैंने सब-कुछ त्याग दिया और इस एकान्त बन में इस वृक्ष के नीचे बैठा हुआ हूँ तो मुझे कोई भय, चिन्ता और सन्देह नहीं । मैं बहुत ही सुखी और सुरक्षित हूँ-मेरा हृदय एक हिरण के समान शान्त है। इन सात व्यक्तियों में से आगे जाकर कई एक बहुत ही प्रसिद्ध हुए। आनन्द, गौतम का बहुत निकटस्थ प्रिय शिष्य हुआ और इस व्यक्ति ने गौतम की मृत्यु के पश्चात् राजगृह में ५०० भिक्षुओं की एक बड़ी भारी सभा बनाई, जिसमें वुद्ध के सब सिद्धान्तों और समस्त वचनों को फिर से दोहराया और एकत्रित किया गया । उपाली यद्यपि हज्जाम था, लेकिन वह भी एक बड़ा प्रसिद्ध हुआ। आजतक विनय-पिटक के सम्बन्ध में उसके वाक्य प्रमा- णित माने जाते हैं। इससे जाहिर है कि बुद्ध ने जो भिन्नु-संघ स्थापित किया था उसमें जाति-भेद बिल्कुल नहीं रक्खा गया था । अनिरुद्ध, आम-धर्म-पिटक का सबसे बड़ा शिक्षक हुआ। देवदत्त कुछ समय बाद गौतम का विरोधी और शत्रु बन गया। उसने मगध के राजकुमार अजातशत्रु को, अपने ही पिता बिम्बसार को मार डालने के लिए उत्तेजित किया और गौतम के भी वध करने की चेष्टा की। -