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रमैनी। (५६) बहतभये । करगी बुड़ाकोजलनो छिटकैं। ताको कहै। सो यह माया ब्रह्मको जो धोखारूपवूड़ाहै ताकेआवतमें काहुनकही कियाधोखाबह्मनपरोबूड़िजाउगे ॥१॥ आईकरगीभोअजगूता । जन्मजन्मयमपहिरेबूता ॥२॥ | जब करगी आई तब अयुक्ति होत भई कैसी भई कि, जन्म जन्म कहे जब जब ब्रह्मांडनकी उत्पत्तिभई तब तब यम पहिरे बूता कहे यमको काल निरंजन जैहैं तिनको बूता कहे पराक्रम काल पहिरत भयो अर्थात् काल तो जड़है निरंजनै को पराक्रम लैकै जीवनको मारैहै ॥ २ ॥ बुतापहिरियमकीनपयाना। तीनिलोकमोकीनसमाना॥३॥ बांधे ब्रह्मा विष्णु महेशु । पार्वती सुत बांधगणेशू ॥ ४॥ बँधेपवनपावकनभनीरू । चंद्रसूर्य बाँधे दोउबीरू ॥ ८॥ वही निरंजन को बुताकहे पराक्रम काललैकै पयान कियो सो लव दिन पक्ष मास वर्ष युग कल्परूप करिकै तीनलोकमें समाइ जातभये ॥ ३ ॥ जौन काल तीनलोकमें समानो ताहीमें ब्रह्मा विष्णु महेश षण्मुख गजमुखादि आयुर्दा| य प्रमाण रूपते सब बँधतभये ॥ ४ ॥ अरु ताहीमें पवन औ पावक औ पानी औ चन्द्र सूर्य नभ सब बँधत भये ॥ ५ ॥ सांचमंत्र सबबांधे झारी । अमृत वस्तु न जानै नारी ॥६॥ । झारादैकै जे साहबके सांचमंत्र तिनहूँको काल बांधिलियो काहेते कि जो साहबके मंत्र का अर्थप्रभाव सोई आवरण है औ साहबको ज्ञानरूप अमृत वस्तु जानि परत भये नारी जो आवरणकैलियो माया तामॅपरे जे जीव ते न जानें जो जानेंगे तो हमारेमारे न मैरेंगे याही हेतुते बांध्याहै ॥ ६ ॥ साखी ॥ अमृत वस्तु जानै नहीं, मगन भये कित लोग। ककबिरकामोनहीं, जीवहमरन न योग ॥ ७॥ अमृत बस्तु जो साहब है ताको तो न जान्यो कौने कुत्सित संसार में तू मगन भयो कौन साहब जो काम नहीं अर्थात् कामें नहीं है सबहीमें हैं सों