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शोभित आकाशमण्डल की छवि हृदय में धारण करके वृत्य करतीं करती सागर के सम्मुख जा रही हैं।

पण्डित लोग कहते हैं कि इस जगत का धन मान सभी अस्थायी है, पर हम कहते हैं कि शोक दुःख भी अस्थायी है। काल में सभी सहा जाता है। वृद्धा का शोकावेग भी अनेक हास को पहुंचा। वह रोदन परित्याग कर के नीरव बैठी थो, और मन मन में कुछ भावना कर रही थी इतनेही में पासही किसी स्त्री का अनुच्च रोदन सुना। प्रथमबार सुनकर कुछ ठहरा नहीं सकी इस निमित्त फिर मन देकर सुना। जाना गया कि एक स्त्री का रोदन शब्द है। वृद्धा ने अपने कनिष्ट पुत्र को पुकारा 'गंगाधर' गंगा धर माता के निकट आया। वृद्धा ने अंगुलिनिर्देश करके कहा 'इस दिशा में स्त्री का रोदन सुना जाता है, मेरे संग आ, देखें। माता पुत्र दोनों जने चले, वहां जाय कर देखा तो एक बालिका नदी के तोर बालू के टीले पर पड़ी है, अगुञ्च रोदन कर रही है। उस रोदन करने की शक्ति कदाचित् न होगी।

वृद्धा ने अत्यन्त व्यस्तता से निकट जाय कर उसे पकड़ कर उठाते २ कहा 'बेटी! तू कौन है?" बालिका ने कुछ उत्तर नहीं दिया हाथ बढ़ाकर वृद्धा का हाथ पकड़ लिया किन्तु वृद्धा को उसके उठाने में असमर्थ देखकर गंगाधर