पृष्ठ:प्रेमघन सर्वस्व भाग 1.djvu/५६३

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साफ करो बन्दूकैं, टोटा टोओ, ढाल सुधारो रामा।
हरि २ धरो सान तरवारन लै कर भाला रे हरी॥
ढीलढाल कपड़ा तजिकै अब पहिरौ फौजी कुरती रामा।
हरि २ डीयर वालेन्टीअर! सजो रिसाला रे हरी॥
ढुनमुनिया सम सहज कबाइत करि जिय कसक मिटाओ रामा।
हरि २ कजरी लौं गाओ बस करखा आला रे हरी॥
मार! मार! हुंकार सोर सुर सांचे सब ललकारो रामा।
हरि २ सत्रुन के सिर ऊपर दै सम-ताला रे हरी॥
बहुत दिनन पर ई दिन आवा देव ताव मोछन मैं रामा।
हरि २ सुभट समर सावनवाँ बीतल जाला रे हरी॥
उठो बढ़ो धाओ धरि मारो बेगि न बिलम लगाओ रामा।
हरि २ पड़ा कठिन कट्टर से अब तौ पाला रे हरी॥
उठैं घूम के स्याम सघन घन गरजें तोप अवाजैं रामा।
हरि २ गिरैं वज्र सम गोला बम्ब निराला रे हरी॥
झरी बूँद सी बरसाओ बस गोली बन्दूकन सों रामा।
हरि २ चमकाओ चपलासी कर करवाला रे हरी॥
कहरैं मोर सरिस दादुर लौं बिलबिलायँ गिरि घायल रामा।
हरि २ बिना मोल मनइन कै मूड़ बिचाला रे हरी॥
करो प्रेमघन भारत भारत मैं मिलि भारतवासी रामा।
हरि २ महरानी का होय बोल औ बाला रे हरी॥१४८॥

आवश्यक निवेदन


धावो भारतवासी भाई! लागो गैय्यन की गोहार॥
अन्न सुतन जाके उपजावत जोतत भूमि अपार।
पियह दूध घृत खाय जासु तुम सूतहु पाँय पसार॥
दीन बचन उच्चरत चरत तृन करि उपकार हजार।
अन्तहु मुएँ तुमैं बैतरनी आवत जाय उतार॥