पृष्ठ:प्रेमघन सर्वस्व भाग 1.djvu/५३१

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उर्दू भाषा


नई तरहदारी है यह, या नई सितमगारी है (जानी)
(दिलबर!) लगी नई बतलाओ, किससे यारी ये जानी?
क्याही सूरत प्यारी, उबले आँखें भरी खुमारी (जानी)
(दिलबर!) नई जवानी की छाई सर्शारी (ये जानी)
है जोड़ा ज़ंगारी पर, यह आज तेज रफ्तारी जानी;
(दिलवर!)किधर चले हो करने को अय्यारी? (ये जानी)
अजब प्रेमघन 'अब्र' हमें इस दिल से है लाचारी जानी;
(दिलबर!) इसै जो है मंज़ूर तेरी गम्‌खारी (ये जानी)॥८३॥

तीसरा प्रकार
साँवर गोरिया
सामान्य लय
ब्रज भाषा


दोऊ मिलि करत बिहार साँवर गोरिया॥
आजु कलिन्दी कूलन कुसुमित कदम निकुञ्ज मझार सांव॰
दोउ दुहूँ पर मन करत निछावर दोउ दुहूँ ओर निहार सां॰
दोउ दुहूँ के गरबाहीं दीने रूसत करि तकरार सां॰ गो॰
बरसत दोउ रस उमड़ि प्रेमघन मुख चूमत करि प्यार सां॰

दूसरी


कैसी करूँ कहाँ जाँव अब दैय्या रे॥
बरसाने के धोखे देखो आय गई नन्दगाँव अब दैय्या रे॥
जिय डरपत हिय थर २ कांपत लाग्यो वाको दाँव अब दै॰
मिलै न कहुँ मग बीच प्रेमघन मोहन जाको नाव अब दै॰