पृष्ठ:प्रेमघन सर्वस्व भाग 1.djvu/३

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प्रथमावृत्ति : सं॰ १९९६ वि॰ १००० प्रतियां
द्वितीयावृत्ति : शक १८८४; ११०० प्रतियां

 

मूल्य : दस रुपए

 

मुद्रक
सम्मेलन मुद्रणालय, प्रयाग