पृष्ठ:प्रेमघन सर्वस्व भाग 1.djvu/२०९

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नेह निधि पयान (श्री कृष्णदेव शरण सिंह जू देव की मृत्यु पर लिखित शोकोच्छ्वास-- जो प्रेमघन जी तथा भारतेन्दु के अनन्य मित्रों में थे, और निर्वासित भरतपूर नरेश थे। १३ अप्रैल १९०६ ई० में उनकी मृत्यु पर प्रेमघनजी ने यह कविता लिखी थी।)