पृष्ठ:प्रेमघन सर्वस्व भाग 1.djvu/१७८

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धायो लैकर काढ़ि कृपान। सबसों लियो कराय बखान॥
पै इन कहँ लखि प्रबल महान। भाग्यो तुमहुँ अवश्य डरान॥
छिप्यो छीर सागर महँ आन। अहि पर परयो होय हत ज्ञान॥
नहिं तौ हियो बनाय पखान। तजि कै न्याय दया की बान॥
सह्यो भला कैसे भगवान। ए अनीति के वृन्द महान॥
गुलबर्गे को महमद रान। काट्यो पांच लाख हिन्दुआन॥
दूध पियत बालकन अयान। को न दया करि छाँड़ेहु प्रान॥
राज कुमार के देस तिलंगान। पकरि कटायो तासु जबान॥
जियतहिं जलत आगि में आन। हाय जलायो काठ समान॥
अहमद जा छन करै पयान। हिन्दु बीस हजार प्रमान॥
सों जब अधिक कट जेहि थान। तह दिन तीन मोद मनमान॥
देखै सनै नाच औ गान। जब फर्रुख सीयर दुखदान॥
बन्दे गुरु सिखन को मान। पकरि सहित बालक जेहि आन॥
कह्यो मारु निज सुत को प्रान। पिता न जब अज्ञा यह मान॥
तुरत तासु सुत को हरि प्रान। काढ़ि करेज तासु दुखदान॥
फेंक्यो ता ऊपर जेहि आन। त्राहि त्राहि जब वह चिल्लान॥
तब ताते ताते चमचान। सो तन नोचि नोचि दुखदान॥
मार्यो या दुर्गति सों प्रान। सहित सात सौ सिक्स सुजान॥
बस इतने ही सों अनुमान। लेहु तासु मन की गति जान॥
जम्बूराज कुमार महान। गहि तैमूर पूर दुख दान॥
जबै मुवारक शाह बलान। गहि राजा जैपाल सुजान॥
खाल खींचकर मारयो प्रान। दियो भराय भुस्स दुख दान॥
शिवाराज जग विदित महान। ता सुत संभा जी बलवान॥
आलमगीर महा दुखदान। छल सों पकरि गह्यो जेहि आन।
कह्यो म्लेच्छ हो मूसलमान। सुनतहिं कुरुख भयो बलवान॥
तब लै कर लोहा गरमान। काढ़यो तुरत युगल नैनान॥
ताहू पै फिर काटि जबान। मारयो या दुर्गति सों प्रान॥
तासों हम पूंछत एहि आन। तुम सों गदाधरन भगवान॥