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यमलोक का जीवन

आश्चर्य सा हुआ। उन्होंने शायद अपने मन में समझा कि यह कोई महाबलवान दानव उनके घर में घुस आया है। ये चिड़ियाँ बहुत बड़ी न थीं। उन की छाती सफेद और पीठ काली थी।

पाँच रोज तक उस पतले बर्ष को फाड़ता हुआ हमारा जहाज चला गया। उस रोज हमको दक्षिणी ध्रुव के पास का प्रदेश देख पड़ा। वर्ष से ढके हुए उन आकाश भेदो पर्वतों का दृश्य हमको कभी न भूलेगा। १० सें लेकर १५ हजार फुट तक वे स्वच्छ और निरभ्र नीले आकाश के भीतर चले गये थे। वहाँ पर, हम लोगों के लिए बहुत कम काम था। पोधो ओर जीवधारियों के नमूने हम लोगों को लेने थे। परन्तु वहाँ पर दो एक सामुद्रिक पौधे, सील और पेनगुइन के समान दो चार चिड़ियों को छोड़ कर ओर कुछ था ही नहीं। यह बात उत्तरी ध्रुव में नहीं। वहाँ अनेक प्रकार के वनस्पति और पशु पक्षी पाये जाते हैं।

दक्षिणी ध्रुव में एक प्रकार की सील बहुत अधिकता से होती है। उसी पर हम लोग प्रायः बसर करते थे। तौल में वह कोई १४ मन होता है। ये मछलियाँ बर्फ के ऊपर धीरे धीरे घूमा करती है; आदमी से वे जरा भी नहीं डरतीं। उन्होंने कभी आदमी देखा ही नहीं। अतएव मारने के लिए भी यदि आदमी उन के पास