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पुरातत्त्व-प्रसङ्ग


चढ़ाइयाँ और कीं। उनकी तीसरी चढ़ाई १९१३ में हुई। १९०६ ईसवी वालो दूसरी चढ़ाई में उन्हें एक ऐसी कोठरी मिली जो बाहर से बन्द थी, परन्तु भीतर जिसके पुस्तके भरो हुई थीं। इन पुस्तको का कुछ ही अंश डाक्टर स्टीन को मिला; अवशिष्ट अंश एम० पेलियो नाम के एक फ्रेंच विद्वान् के हाथ लगा। इस चढ़ाई का बहुत ही विशद वर्णन डाक्टर स्टीन ने पाँच बड़ी बड़ी जिल्दो में किया है। वे प्रकाशित भी हो गई हैं। उनका नाम है सेरेण्डिया (Serindia)।

अपनी दूसरी चढ़ाई में जिस समय डाक्टर स्टीन तुर्किस्तान में प्राचीन चिन्हो और वस्तुओं की खोज कर रहे थे उसी समय मध्य एशिया में खोज करने के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक परिषद् की स्थापना हुई। इसकी सहायता फ्रांस की गवर्नमेण्ट ने भी धन से की और कई एक अन्य सभाओं ने भी की। इस परिषद् ने एक चढ़ाई की योजना की। एम० पेलियो, जिनका नाम ऊपर एक जगह आया है वे इसके प्रधानाध्यक्ष नियत हुए। वे अपने दल-बल-समेत जून १९०६ में पेरिस से रवाना हुए और मास्को, ताशकन्द होते हुए, पामीर के उत्तर काशगर तक पहुंच गये। वहाँ आस पास खोज करते हुए वे तुन-हॉग नामक स्थान में पहुँचे। इसके कुछ ही समय पहले डाक्टर स्टीन एक गुफा से